जो इंडिया / मुंबई: (Pune Company Shutdown)
पुणे के हिंजवाड़ी स्थित राजीव गांधी इन्फोटेक पार्क से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आईटी सेक्टर में काम करने वाले हजारों युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। आईटी पार्क के फेज-2 में संचालित एक निजी कंपनी कथित तौर पर रातोंरात अपना कार्यालय बंद कर फरार हो गई, जिससे करीब 700 इंजीनियर अचानक बेरोजगार हो गए। शुक्रवार सुबह जब कर्मचारी रोज की तरह दफ्तर पहुंचे तो कंपनी के कार्यालय पर ताला लटका मिला। कर्मचारियों ने कई बार कंपनी प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का जवाब नहीं मिला।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पुणे शहर पहले से ही जहरीली शराब कांड के कारण चर्चा में है। एक ओर जहरीली शराब से हुई मौतों का सदमा अभी लोगों के मन से गया नहीं था, वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर में रोजगार संकट की यह खबर युवाओं और उनके परिवारों के लिए बड़ा झटका बनकर सामने आई है।
बड़े-बड़े सपने दिखाकर की थी भर्ती
कर्मचारियों के अनुसार कंपनी ने पिछले वर्ष बड़े स्तर पर भर्ती अभियान चलाया था। कॉलेजों और जॉब पोर्टलों के माध्यम से सैकड़ों फ्रेशर इंजीनियरों को नौकरी दी गई थी। युवाओं को आकर्षक वेतन, करियर ग्रोथ और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर काम करने का अवसर देने का दावा किया गया था। कई कर्मचारियों ने नौकरी के लिए दूसरे शहरों से पुणे का रुख किया और किराए पर मकान लेकर यहां बस गए।
शुरुआती कुछ महीनों तक कंपनी का कामकाज सामान्य रहा, लेकिन इस वर्ष फरवरी के बाद से हालात बिगड़ने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन भुगतान में लगातार देरी होने लगी। पहले जहां हर महीने समय पर सैलरी मिलती थी, वहीं बाद में भुगतान कई-कई सप्ताह तक टलने लगा। कुछ कर्मचारियों को तो एक महीने से अधिक समय तक वेतन नहीं मिला।
ऑडिट का बहाना, फिर अचानक गायब हुआ प्रबंधन
जब कर्मचारियों ने वेतन में देरी को लेकर सवाल उठाए तो कंपनी प्रबंधन ने आंतरिक ऑडिट और वित्तीय पुनर्गठन का हवाला दिया। कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया कि सभी बकाया भुगतान जल्द कर दिए जाएंगे। कई बैठकों में कर्मचारियों को धैर्य रखने की सलाह दी गई और कंपनी के भविष्य को सुरक्षित बताया गया।
लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। पिछले कुछ हफ्तों से कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी कार्यालय में कम दिखाई दे रहे थे। कई विभागों की गतिविधियां भी अचानक कम हो गई थीं। इसके बावजूद कर्मचारियों को किसी संभावित संकट की जानकारी नहीं दी गई। शुक्रवार सुबह जब कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कंपनी ने अपना संचालन बंद कर दिया है।
700 परिवारों पर टूटा संकट
कंपनी के बंद होने से केवल 700 इंजीनियर ही प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि उनके परिवारों पर भी आर्थिक संकट मंडराने लगा है। कई कर्मचारी गृह ऋण, वाहन ऋण और शिक्षा ऋण की ईएमआई भर रहे हैं। कुछ कर्मचारी हाल ही में शादीशुदा हैं, जबकि कई अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि अचानक नौकरी चले जाने से उनके सामने किराया, बच्चों की फीस और रोजमर्रा के खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों ने श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि बकाया वेतन और अन्य देय राशि उन्हें मिल सके।
आईटी सेक्टर में बढ़ रही अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में आईटी उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक आर्थिक मंदी, विदेशी कंपनियों द्वारा खर्च में कटौती, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के कारण रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। कई कंपनियां लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं, जबकि कुछ कंपनियां संचालन ही बंद कर रही हैं।
हिंजवाड़ी, जो कभी देश के सबसे तेजी से बढ़ते आईटी केंद्रों में गिना जाता था, वहां भी रोजगार को लेकर अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि नई परियोजनाओं की गति पहले जैसी नहीं रही और कई कंपनियां विस्तार योजनाओं को टाल रही हैं।
सरकारी नीतियों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रोजगार सृजन की गति कमजोर हुई है और युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को ऐसे मामलों में सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए ताकि कोई कंपनी कर्मचारियों को बिना सूचना दिए इस तरह बंद न कर सके।
विपक्ष ने यह भी मांग की है कि प्रभावित कर्मचारियों के लिए विशेष राहत पैकेज, कौशल उन्नयन कार्यक्रम और वैकल्पिक रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही कंपनियों द्वारा वेतन भुगतान और कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून लागू करने की आवश्यकता बताई गई है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। श्रम विभाग, उद्योग विभाग और पुलिस से मामले की जांच कर कंपनी प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।
पुणे के आईटी गलियारों में इस घटना की चर्चा तेज है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि आईटी क्षेत्र में रोजगार सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और कंपनी की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



