जो इंडिया / मुंबई / सोलापुर: (Vande Bharat Accident)
देश की सबसे आधुनिक और तेज रफ्तार ट्रेनों में शामिल वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर गई है। मुंबई से सोलापुर जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22225) सोमवार शाम पुणे रेलवे स्टेशन पर प्रवेश करते समय पटरी से उतर गई। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी यात्री को चोट नहीं आई, लेकिन इस हादसे ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
जानकारी के मुताबिक, शाम करीब 7:30 बजे ट्रेन जब पुणे स्टेशन के प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही थी, तभी चौथे कोच की ट्रॉली अचानक पटरी से उतर गई। ट्रेन की गति कम होने के कारण बड़ा हादसा टल गया, लेकिन कुछ क्षणों के लिए स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यात्रियों में डर और घबराहट फैल गई।
बताया जा रहा है कि जिस डायमंड क्रॉसिंग पर यह घटना हुई, वहां यार्ड रिमॉडलिंग प्रोजेक्ट के तहत अपग्रेडेशन का काम चल रहा था। सूत्रों के अनुसार यह कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब ट्रैक का काम अधूरा था, तो उसी रूट पर हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को चलाने की मंजूरी किसने दी?
रेलवे प्रशासन भले ही इस घटना को तकनीकी खराबी बताकर मामले को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि अधूरी परियोजनाओं के बीच ट्रेनों का संचालन गंभीर लापरवाही माना जाना चाहिए। यदि ट्रेन की रफ्तार अधिक होती, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।
हादसे के तुरंत बाद रेलवे की क्विक रिस्पांस टीम मौके पर पहुंची। यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। साथ ही ट्रैक बहाली और तकनीकी जांच का काम शुरू कर दिया गया। कई ट्रेनों की आवाजाही भी कुछ समय के लिए प्रभावित रही।
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे के चमकदार दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर उजागर कर दिया है। करोड़ों रुपये की परियोजनाओं और आधुनिक ट्रेनों के प्रचार के बीच यदि मूलभूत सुरक्षा मानकों की अनदेखी होगी, तो यात्रियों का भरोसा कमजोर होना तय है।



