‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए अदालत का ऐतिहासिक फैसला, वर्दी के दुरुपयोग पर सख्त संदेश
जो इंडिया / चेन्नई: (Sathankulam Incident)
तमिलनाडु के सथानकुलम में हुई बाप-बेटे की कस्टोडियल मौत के मामले में छह साल बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इंसानियत को झकझोर देने वाली इस घटना में शामिल नौ पुलिसकर्मियों को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए मौत की सजा दी गई है। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पुलिस हिरासत में होने वाले अत्याचारों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी है।
यह मामला साल 2020 का है, जब लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने के आरोप में जयराज को पुलिस ने हिरासत में लिया था। जब उनके बेटे बेनिक्स को इसकी जानकारी मिली, तो वह अपने पिता को देखने थाने पहुंचा। लेकिन यह मुलाकात दोनों के लिए आखिरी साबित हुई।
थाने के भीतर घंटों चला बर्बर अत्याचार
जांच में सामने आया कि थाने के अंदर जयराज और बेनिक्स के साथ कई घंटों तक अमानवीय मारपीट की गई। जब बेटे ने अपने पिता पर हो रहे अत्याचार का विरोध किया, तो पुलिसकर्मी उस पर भी टूट पड़े। दोनों को कपड़े उतरवाकर अपमानित किया गया और बेरहमी से डंडों से पीटा गया।
चार्जशीट के मुताबिक, उन्हें इस तरह प्रताड़ित किया गया कि उनके शरीर पर गंभीर जख्म हो गए, जो अंततः उनकी मौत का कारण बने। यह क्रूरता सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और मानवीय गरिमा को भी रौंदने वाली थी।
फोरेंसिक और सीबीआई जांच ने खोली सच्चाई
मामले की जांच जब केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई, तो कई चौंकाने वाले सबूत सामने आए। थाने के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए डीएनए सैंपल पीड़ितों से मेल खाए। फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम ने साफ कर दिया कि दोनों की मौत पुलिस हिरासत में हुई बर्बर पिटाई के कारण हुई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं, जो लगातार यातना का प्रमाण थीं।
रहम की गुहार भी नहीं सुनी गई
जयराज ने बार-बार अपनी बीमारी का हवाला देते हुए पुलिस से मारपीट रोकने की अपील की थी। उन्होंने ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का जिक्र करते हुए रहम की भीख मांगी, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। आरोप है कि पुलिसकर्मी जानते थे कि अत्याचार जानलेवा हो सकता है, फिर भी वे नहीं रुके।
इतना ही नहीं, दोनों को अपने खून से सने कपड़े खुद साफ करने के लिए मजबूर किया गया, जो इस घटना की क्रूरता को और उजागर करता है।
देशभर में उठा था आक्रोश
इस घटना के सामने आते ही पूरे देश में गुस्सा फूट पड़ा था। मानवाधिकार संगठनों, राजनीतिक दलों और आम जनता ने न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाई थी। इस मामले में कुल 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक की बाद में मृत्यु हो गई।
6 साल बाद मिला न्याय
लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार देते हुए मौत की सजा सुनाई।



