मुंबई में आयोजित एक इफ्तार पार्टी को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। 14 मार्च 2026 को Sanjay Raut
इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद संजय राऊत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह एक सामाजिक कार्यक्रम था और इसमें शामिल होने का उद्देश्य सिर्फ आपसी मुलाकात और सौहार्द बनाए रखना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। राऊत के मुताबिक, विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना भारतीय परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
हालांकि, इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा प्रवक्ता Keshav Upadhye ने सोशल मीडिया पर संजय राऊत पर निशाना साधते हुए कुछ तस्वीरें साझा कीं और तंज कसते हुए टिप्पणी की।
अयोध्येच राम मंदिर दूरच राहिलं…
पंढरपूरचा गाभाराही युवराजाना जड वाटतो…
पण अबू आजमीच्या इफ्तारला खजूर मात्र संजय राऊताना गोड लागतो!#Hindutva #DoubleStandards #MaharashtraPolitics #संजयराऊत #उबाठा #हिंदुत्व pic.twitter.com/5QHFiNc5nF
— Keshav Upadhye (@keshavupadhye) March 15, 2026
केशव उपाध्ये ने अपने पोस्ट में लिखा कि “अयोध्या में राम मंदिर तो दूर की बात है… पंढरपुर के राजकुमार को भी भारी लगता है… लेकिन अबू आज़मी के इफ्तार में खजूर तब मीठे लगते हैं जब संजय रोते हैं!” इस बयान के जरिए उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) और संजय राऊत पर राजनीतिक हमला बोला।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि यह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम था, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक अवसरवाद से जोड़कर देख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावी माहौल को देखते हुए इस तरह के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। फिलहाल इस इफ्तार पार्टी को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी का सिलसिला जारी है।



