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Mira Bhayandar flyover: मीरा भायंदर में फोर लेन का फ्लाईओवर टू लेन में बदला, MMRDA पर आदित्य ठाकरे की सियासी चुटकी

Mira Bhayandar Flyover

मुंबई से सटे ठाणे के मीरा-भायंदर इलाके में हाल ही में बने एक फ्लाईओवर (Mira Bhayandar flyover) ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छेड़ दी है। वजह—इस पुल का ऐसा डिज़ाइन, जो चलते-चलते अचानक चार लेन से दो लेन में बदल जाता है। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, लोगों ने सवालों की बौछार कर दी—क्या यही है स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर?

विवाद बढ़ता देख मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA)

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को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। MMRDA ने साफ कहा कि डिज़ाइन में कोई गलती नहीं है और यह बदलाव पूरी तरह सोची-समझी इंजीनियरिंग प्लानिंग का हिस्सा है।

लेकिन इसी बीच इस ऑनलाइन बहस में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) की एंट्री ने मामले को सियासी रंग दे दिया। आदित्य ठाकरे ने सीधे तौर पर MMRDA के प्रभारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए तीखा पोस्ट किया।

आदित्य ठाकरे ने लिखा- “बिल्कुल सही। लोगों को MMRDA और इस मास्टरपीस को डिज़ाइन करने वाली टीम का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए। अगले साल इस डिज़ाइन को दूसरे देशों को सिखाने के लिए एक और MoU होगा। पुल बाकी सभी वादों की समय-सीमा तक पूरा हो जाएगा—2047।”

यहीं नहीं, उन्होंने आगे सवाल उठाया कि “किस बेवकूफी की वजह से ऐसे भयानक डिज़ाइन सामने आ रहे हैं, जहां 4 लेन अचानक 2 लेन में बदल जाती हैं और MMRDA इस हरकत का बचाव कर रहा है?”

आदित्य ठाकरे ने साफ कहा कि अगर लेन कम करनी ही थी, तो उसे बेहतर और सुरक्षित तरीके से डिजाइन किया जा सकता था। इस तरह का अचानक बदलाव अराजकता और भारी ट्रैफिक जाम को न्योता देगा। पोस्ट के अंत में उन्होंने चुटकी लेते हुए लिखा— “अंदाज़ा लगाइए MMRDA के प्रभारी मंत्री कौन हैं 😄🎪”

MMRDA की सफाई

MMRDA ने अपने बयान में कहा कि यह लेन बदलाव जगह की उपलब्धता और भविष्य की विस्तार योजनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल फ्लाईओवर को भायंदर ईस्ट के लिए दो लेन में डिजाइन किया गया है, जबकि भविष्य में वेस्टर्न रेलवे लाइन पार कर भायंदर वेस्ट की ओर अतिरिक्त दो लेन जोड़ने के लिए जगह छोड़ी गई है।

हालांकि, सवाल अब भी कायम है— क्या भविष्य की योजनाओं के नाम पर आज का ट्रैफिक अराजकता में झोंका जा रहा है? और क्या यह डिज़ाइन वाकई इंजीनियरिंग का कमाल है या फिर सिस्टम की बड़ी नाकामी?

मीरा-भायंदर का यह फ्लाईओवर अब सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, जवाबदेही और राजनीति की टक्कर का प्रतीक बन चुका है।

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