रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले
रांची में पुरानी विधानसभा के सामने आयोजित झारखंड नवनिर्माण रैली को संबोधित करते हुए आठवले ने कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, लेकिन गलत राजनीतिक फैसलों के कारण इसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। आठवले ने दो टूक कहा कि कांग्रेस के साथ रहकर झारखंड का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
आठवले ने सवाल उठाया कि जब केंद्र में मोदी सरकार गरीबों, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, तो झारखंड खुद को उस विकास धारा से अलग क्यों रखे। उन्होंने कहा कि एनडीए में शामिल होते ही राज्य को केंद्र सरकार की योजनाओं, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का सीधा लाभ मिलेगा।
इस मौके पर आठवले ने रिपब्लिकन पार्टी की झारखंड इकाई की नई कार्यकारिणी का ऐलान करते हुए शिव उरांव को प्रदेश अध्यक्ष और देवीदयाल मुंडा को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया। आठवले ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी झारखंड में दलित–आदिवासी एकता के दम पर एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनेगी।
रैली में मौजूद सैकड़ों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आठवले ने अपील की कि वे झारखंड के हर गांव तक रिपब्लिकन पार्टी का नीला झंडा पहुंचाएं और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की विचारधारा को जन-जन तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लड़ती है।
अपने तीखे अंदाज में आठवले ने कहा, “अब फैसला हेमंत सोरेन को करना है — राजनीति बचानी है या झारखंड का भविष्य। अगर विकास चाहिए, तो एनडीए ही एकमात्र मजबूत विकल्प है।” आठवले ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपब्लिकन पार्टी आने वाले समय में युवाओं को नेतृत्व में बड़ी भूमिका देगी और झारखंड की राजनीति में नई ऊर्जा के साथ उतरेगी।
कुल मिलाकर, आठवले का यह बयान झारखंड की राजनीति में हलचल मचाने वाला है और आने वाले दिनों में राज्य की सियासत और भी तीखी होने के संकेत दे रहा है।



