जोइंडिया टीम/ मुंबई: महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले के बयान ने एक बार फिर देश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई। राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से किए जाने के आरोपों पर घिरे नाना पटोले ने अब पूरे मामले पर खुलकर अपना पक्ष रखा है।
ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में नाना पटोले (Nana Patole) ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी भी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की भगवान राम से तुलना नहीं की। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी की लड़ाई शोषित, पीड़ित और वंचित वर्ग के लिए है। उनकी राजनीति देश और संविधान को बचाने की है। मैंने सिर्फ इतना कहा है कि राहुल गांधी भगवान श्रीराम द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर काम कर रहे हैं।”
#WATCH | नागपुर, महाराष्ट्र: कांग्रेस नेता नाना पटोले ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के बयान पर कहा, “…राहुल गांधी की लड़ाई शोषित, पीड़ित, वंचित वर्ग के लिए है, देश के लिए है… मैंने राहुल गांधी और भगवान श्री राम की तुलना नहीं की। मेरा मानना है कि राहुल गांधी भगवान राम के… pic.twitter.com/r4KZSzdhd2
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 1, 2026
पटोले ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन अन्याय के खिलाफ संघर्ष और समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने का प्रतीक रहा है। उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी भी आम जनता, गरीबों, दलितों और वंचितों की आवाज बनकर लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सेवा की राजनीति में विश्वास रखते हैं, न कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल करने में।
इस दौरान नाना पटोले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश में असली मुद्दों से ध्यान हटाकर दिखावे और फोटो सेशन की राजनीति की जा रही है। पटोले ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याएं समझते हैं, जबकि मौजूदा सत्ता सिर्फ प्रचार में व्यस्त है।
नाना पटोले ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक दल या व्यक्ति की बपौती नहीं हैं। राम का मार्ग सत्य, न्याय और करुणा का मार्ग है, और उसी रास्ते पर चलने की प्रेरणा राहुल गांधी को मिलती है।
पटोले के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान और तेज हो गया है। जहां भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।



