जो इंडिया / नवी मुंबई : (New Era Hospital)
चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए नवी मुंबई स्थित न्युईरा अस्पताल (New Era Hospital, located in Navi Mumbai) के डॉक्टरों ने एक ही सर्जरी में तीन अत्यंत गंभीर और जानलेवा ब्रेन समस्याओं का सफल इलाज कर 54 वर्षीय महिला की जान बचाई है। यह मामला इसलिए भी खास है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी जटिल स्थितियों में अलग-अलग सर्जरी करनी पड़ती है, लेकिन यहां डॉक्टरों की सटीक योजना, अनुभव और आधुनिक तकनीक के दम पर एक ही ऑपरेशन में मरीज को नया जीवन मिल गया।
कोपरखैरणे की रहने वाली श्रीमती सुमन पोखरे पिछले करीब 15 दिनों से लगातार कमजोरी, चलने में संतुलन बिगड़ने और दैनिक कामकाज में परेशानी महसूस कर रही थीं। परिजनों द्वारा अस्पताल लाए जाने पर की गई जांच में सामने आया कि उनके दिमाग पर अत्यधिक दबाव है। शुरुआती जांच में केवल एक ब्रेन ट्यूमर की आशंका जताई गई थी, लेकिन विस्तृत परीक्षण और सर्जरी की तैयारी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दिमाग के दोनों हिस्सों में दो बड़े ब्रेन ट्यूमर मौजूद हैं और इसके साथ ही दिमाग में खून (सबड्यूरल ब्लीड) भी जमा हो चुका है। यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ और किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती थी।
ब्रेन ट्यूमर की बीमारी आमतौर पर एक लाख लोगों में लगभग चार को होती है, लेकिन दिमाग के दोनों ओर ट्यूमर का होना और साथ में दिमाग में खून जम जाना बहुत ही कम मामलों में देखा जाता है। इन तीनों समस्याओं में से प्रत्येक अपने आप में बेहद खतरनाक होती है और इससे लकवा, बेहोशी, दौरे या मृत्यु तक का खतरा बना रहता है। ऐसे में मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया।
न्युईरा अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. सुनील कुट्टी और उनकी अनुभवी मेडिकल टीम ने करीब पांच घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में दोनों ब्रेन ट्यूमर और दिमाग में जमा खून को सफलतापूर्वक निकाल दिया। 12 नवंबर 2025 को की गई इस क्रैनियोटॉमी सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को एक छिपा हुआ ट्यूमर भी मिला, जो दिमाग की झिल्ली में फैल चुका था और स्कैन में साफ नजर नहीं आ रहा था। ऑपरेशन के दौरान लिए गए सही और त्वरित फैसलों ने मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
डॉ. कुट्टी के अनुसार, आमतौर पर एक समय में दिमाग की एक ही बड़ी बीमारी का इलाज किया जाता है, लेकिन इस मरीज को एक साथ तीन गंभीर समस्याएं थीं। अगर अलग-अलग सर्जरी की जातीं, तो जोखिम कई गुना बढ़ सकता था। इसलिए पूरी टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर एक ही ऑपरेशन में तीनों समस्याओं का समाधान किया, जिससे मरीज को बार-बार सर्जरी के दर्द और खतरे से नहीं गुजरना पड़ा।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार देखने को मिला। 13 नवंबर को उन्हें आईसीयू से सामान्य कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। कुछ ही दिनों में वे पूरी तरह होश में थीं, अपने हाथ-पैर खुद हिला पा रही थीं और धीरे-धीरे चलने भी लगीं। ऑपरेशन के तीसरे दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दिसंबर में हुए फॉलो-अप में भी उनकी सेहत अच्छी पाई गई और किसी नई दिमागी समस्या के संकेत नहीं मिले।
मरीज सुमन पोखरे ने भावुक होकर कहा कि जब उन्हें पता चला कि दिमाग में खून के साथ दो ट्यूमर भी हैं, तो वे बहुत डर गई थीं, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें हिम्मत दी और आज वे नई उम्मीद के साथ घर लौट रही हैं। वहीं, न्युईरा अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट और सीईओ डॉ. माताप्रसाद बी. गुप्ता ने कहा कि यह सफलता आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी डॉक्टरों और टीमवर्क का परिणाम है।
यह मामला न केवल न्युईरा अस्पताल के लिए बल्कि पूरे चिकित्सा जगत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि समय पर इलाज, सही निर्णय और विशेषज्ञता से सबसे जटिल और दुर्लभ ब्रेन बीमारियों पर भी जीत हासिल की जा सकती है।



