Joindia
मुंबईराजनीतिसिटी

Satya ka morcha: “सत्य का मोर्चा” पर केस दर्ज होने से सियासत में बवाल — विपक्ष ने सरकार पर लगाया दोहरे रवैये का आरोप, भाजपा के ‘मूक मोर्चा’ पर उठे सवाल

IMG 20251103 WA0009

जो इंडिया / मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। “सत्य का मोर्चा” के आयोजकों पर आपराधिक मामला दर्ज किए जाने के बाद विपक्षी दलों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए पूछा है कि भाजपा द्वारा निकाले गए ‘मूक मोर्चा’ को अनुमति किसने दी थी? अगर भाजपा के मोर्चे को मंजूरी दी गई थी तो विपक्ष को क्यों नहीं मिली?

Advertisement

अनुमति न मिलने के बावजूद निकाला गया ‘सत्य का मोर्चा’

राज्य के सभी प्रमुख विपक्षी दलों और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मिलकर मतदाता सूची में गड़बड़ी और कथित वोट चोरी के खिलाफ एक नवंबर को “सत्य का मोर्चा” आयोजित करने की घोषणा की थी। आयोजकों ने इसके लिए बाकायदा पुलिस प्रशासन और राज्य चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। इसके बावजूद फैशन स्ट्रीट से लेकर मुंबई मनपा मुख्यालय तक हजारों कार्यकर्ताओं के साथ विशाल मोर्चा निकाला गया।

इस दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बावजूद पुलिस ने आज़ाद मैदान थाने में आयोजकों पर अवैध जनसमूह इकट्ठा करने, कानून और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के आरोपों में मामला दर्ज किया है।

संदीप देशपांडे का तीखा बयान — “भालू के शरीर पर एक और बाल आ जाए तो क्या फर्क पड़ता है?”

मनसे के मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हम पर पहले भी कई केस दर्ज हुए हैं। ऐसे मामलों से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। भालू के शरीर पर एक और बाल आ जाए तो क्या फर्क पड़ता है? सरकार डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं।”

रोहित पवार का हमला — “गृह विभाग भाजपा कार्यालय से चल रहा है क्या?”

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग के निकम्मेपन के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर केस दर्ज किया जा रहा है। क्या यह लोकतंत्र है? भाजपा के ‘मूक मोर्चा’ को अनुमति दी गई थी क्या? अगर नहीं, तो मंत्री रवींद्र चव्हाण पर केस क्यों नहीं? अगर दी गई थी, तो विपक्ष को क्यों रोका गया? ऐसा लगता है कि राज्य का गृह विभाग भाजपा के कार्यालय से चलाया जा रहा है।”

विपक्षी दलों का संयुक्त हमला

कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे के नेताओं ने एक सुर में सरकार को “लोकतंत्र का गला घोंटने वाला” करार दिया है। उनका कहना है कि जब जनता और विपक्ष चुनाव आयोग से न्याय मांग रहे हैं, तब सरकार उन्हें चुप कराने में लगी है।

सरकार पर बढ़ा दबाव

“सत्य का मोर्चा” पर केस दर्ज होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दल अब राज्यपाल और चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी में हैं।

 

Related posts

बाबा सिद्दीकी की हत्या से फिर दहल उठी मुंबई, मलाड में एमएनएस कार्यकर्ता की हत्या

Deepak dubey

Craze for imported cars: इंपोर्टेड कारों का क्रेज,दस महीने में 98 करोड़ राजस्व प्राप्त

Deepak dubey

नाला साफ करते समय दो की मौत,एक गंभीर

Deepak dubey

Leave a Comment