जो इंडिया / शिरपुर / मुंबई: (Anjali Damania warrant)
सामाजिक कार्यकर्ता और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली अंजली दमानिया (Anjali Damania) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। शिरपुर न्यायालय ने उनके खिलाफ अजामीनपात्र वॉरंट (Non-bailable warrant) जारी किया है। यह कार्रवाई उस मानहानि के मामले में हुई है जो डॉ. मनोज महाजन ने 9 साल पहले, वर्ष 2016 में, दाखिल किया था।
दरअसल, अंजली दमानिया ने 2016 में तत्कालीन महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे पर भ्रष्टाचार और ज़मीन घोटाले के गंभीर आरोप लगाए थे। उन आरोपों के चलते खडसे को अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन अब उसी प्रकरण में दमानिया को जवाबदेही का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
अंजली दमानिया ने वर्ष 2016 में प्रेस कॉन्फ्रेंस में खडसे पर सरकारी जमीन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मनोज महाजन ने दमानिया के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाखिल किया।
मामला न्यायालय में लंबित था, लेकिन दमानिया कई बार सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुईं।
लगातार अनुपस्थिति के कारण अब कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर दिया है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या हो सकती है?
अगर अंजली दमानिया न्यायालय के समक्ष शीघ्र उपस्थित नहीं होतीं, तो पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है।
इस प्रकरण से एक बार फिर यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या सार्वजनिक जीवन में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को आरोप लगाने से पहले पर्याप्त प्रमाण देने चाहिए?
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में फिर से चर्चा का विषय बना दिया है। विपक्षी दल इसे “सत्य की आवाज़ को दबाने का प्रयास” बता रहे हैं, तो वहीं सत्तापक्ष इसे “कानून का सम्मान” करार दे रहा है।
