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Ganeshotsav 2025 guidelines: गणेशोत्सव के लिए सरकार की गाइडलाइन जारी, पीओपी वाली मूर्तियों पर लगाने होंगे लाल निशान, मूर्ति निर्माताओं एवं विक्रेताओं को बनाना होगा रजिस्टर

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जो इंडिया / मुंबई: राज्य सरकार (State Government) ने शुक्रवार को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी गणेश मूर्तियों (Ganesha Idols) के विसर्जन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सभी पीओपी मूर्तियों के पीछे स्पष्ट रूप से एक गोल लाल निशान (ऑइल पेंट से रंगा हुआ) होना अनिवार्य किया गया है, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके।

यह निर्देश हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पीओपी मूर्तियों पर से प्रतिबंध हटाने के फैसले के बाद जारी किया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को पीओपी मूर्तियों के विसर्जन के लिए कड़े दिशा-निर्देश तैयार करने का आदेश दिया था। गणेशोत्सव 26 अगस्त से शुरू हो रहा है और पीओपी मूर्तियों का प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन पर्यावरण प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को आवश्यक निर्देश जारी करने और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। नए नियमों के अनुसार, मूर्ति निर्माता और विक्रेताओं को पीओपी मूर्तियों की बिक्री का रजिस्टर बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह अब मूर्ति बिक्री के लाइसेंस की अनिवार्य शर्त होगी। साथ ही, स्थानीय निकायों को अपने क्षेत्र में उत्सव समितियों और सार्वजनिक मंडलों का पंजीकरण करने के लिए एक विशेष सेल बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। पंजीकरण के दौरान हर स्थापित मूर्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करना अनिवार्य होगा, जैसे कि वह मूर्ति पीओपी से बनी है या नहीं, ताकि विसर्जन की उचित व्यवस्था की जा सके।

दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि स्थानीय निकायों को आयोजक समितियों को छोटी मूर्तियाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जहां बड़ी मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं, वहां आयोजकों को केवल विसर्जन के लिए छोटी प्रतिकृति मूर्ति स्थापित करने की सलाह दी गई है, ताकि बड़ी मूर्ति को दोबारा उपयोग या स्थापना में लिया जा सके।

घरों में स्थापित मूर्तियाँ या छह फीट से छोटी मूर्तियाँ केवल कृत्रिम तालाबों में ही विसर्जित की जा सकेंगी। यदि मूर्ति छह फीट से अधिक ऊंची हो और पास में कोई कृत्रिम तालाब न हो, तो प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन चूंकि पीओपी आसानी से घुलता नहीं है, इसलिए स्थानीय नगर निकायों को अगले दिन स्वयं या किसी विशेष एजेंसी को नियुक्त करके समुद्र तल या जल निकायों से विसर्जित सामग्री निकालनी होगी। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) को पूरे राज्य में पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव के लिए जागरूकता अभियान चलाने का जिम्मा सौंपा गया है।

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