जो इंडिया / मुंबई: (AC Local Train Door Not Open)
17 तारीख को सुबह ठीक 10 बजकर 42 मिनट पर बदलापुर–CST एसी लोकल जब दादर स्टेशन पहुँची, तब एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई। ट्रेन के रुकने के बावजूद डिब्बों के दरवाज़े नहीं खुले, जिसके कारण प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री न तो ट्रेन में चढ़ पाए और न ही अंदर मौजूद यात्री उतर सके। कुछ ही पलों में स्टेशन पर अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन निर्धारित समय पर दादर स्टेशन पर रुकी, लेकिन एसी लोकल के स्वचालित दरवाज़े नहीं खुले। यात्रियों ने पहले दरवाज़ा खुलने का इंतजार किया, लेकिन जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो अंदर बैठे यात्रियों ने खिड़कियों से आवाज़ लगानी शुरू की। बाहर खड़े यात्रियों में भी नाराज़गी बढ़ती गई, क्योंकि दादर जैसे व्यस्त स्टेशन पर कुछ सेकंड की देरी भी बड़ा असर डालती है।
घटना के दौरान कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि लोको पायलट और संबंधित स्टाफ की ओर से समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई। कुछ यात्रियों ने गुस्से में यह सवाल तक उठा दिया कि “क्या लोकल का ड्राइवर सो रहा है?” हालांकि रेलवे की ओर से इस बारे में तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन यह सवाल यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
यात्रियों का कहना है कि एसी लोकल में दरवाज़े पूरी तरह चालक और सिस्टम के नियंत्रण में होते हैं, ऐसे में तकनीकी खराबी हो या मानवीय लापरवाही—दोनों ही स्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से समझौता नहीं होना चाहिए। कई यात्रियों को इस कारण अपने कार्यालय, कॉलेज और अन्य महत्वपूर्ण कामों के लिए देर हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही कुछ देर बाद ट्रेन आगे बढ़ गई, लेकिन तब तक कई यात्री उतरने-चढ़ने से वंचित रह गए। इससे रेलवे की कार्यप्रणाली और एसी लोकल ट्रेनों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यात्रियों ने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दरवाज़े क्यों नहीं खुले—तकनीकी खराबी थी या स्टाफ की लापरवाही। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए रेलवे को ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि रोज़ाना सफर करने वाले आम यात्रियों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
