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Micropenis surgery success: नवी मुंबई में दुर्लभ बीमारी माइक्रोपेनिस से जूझ रहे युवक की सफल सर्जरी, डॉक्टरों ने लौटाया आत्मविश्वास और नई जिंदगी

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जो इंडिया / नवी मुंबई। नवी मुंबई के मेडिकवर हॉस्पिटल (Medicover Hospital in Navi Mumbai

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) में डॉक्टरों ने एक 26 वर्षीय युवक का दुर्लभ बीमारी माइक्रोपेनिस (Rare disease micropenis) का सफलतापूर्वक इलाज कर उसे नया आत्मविश्वास और जीने की उम्मीद दी। युवक का जन्म से ही लिंग अविकसित था और वह इस स्थिति से मानसिक और सामाजिक तौर पर बेहद परेशान था। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक तकनीक की मदद से उसकी लिंग लंबाई 2.5 इंच से बढ़ाकर 6 इंच तक कर दी।

मूल रूप से अलिबाग निवासी नितिन कुमार (बदला हुआ नाम) बचपन से ही इस दुर्लभ स्थिति का शिकार थे, जिसे चिकित्सा विज्ञान में माइक्रोपेनिस कहा जाता है। यह एक जन्मजात विकृति है, जो हार्मोनल और विकास संबंधी गड़बड़ियों के कारण होती है। इस स्थिति में पुरुष का लिंग इरेक्ट अवस्था में भी 3 इंच से बड़ा नहीं हो पाता। दुनिया में यह बीमारी हर 10 लाख पुरुषों में लगभग 1 को होती है।

हार्मोनल असंतुलन और भावनात्मक पीड़ा
नितिन में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर सामान्य से बेहद कम (120 ng/dL) था। उसके अंडकोष छोटे और अविकसित थे। वीर्य में शुक्राणु नहीं पाए गए और एफएसएच व एलएच हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से ऊंचा था। इसकी वजह से उसे न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गहरा आघात लगा।

“इस स्थिति ने मेरे आत्मविश्वास को पूरी तरह तोड़ दिया था। शादी और परिवार बसाने के ख्वाब अधूरे लगने लगे थे। मैं किसी से बात भी नहीं कर पाता था,” मरीज ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा।

विशेषज्ञों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन
मेडिकवर हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. सनीश श्रींगारपुरे और प्लास्टिक व कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. आशिष संगविकर ने इस चुनौतीपूर्ण केस को हाथ में लिया। डॉक्टरों ने सस्पेंसरी लिगामेंट रिलीज, वी-वाय एडवांसमेंट प्लास्टी, और सुप्राप्यूबिक लिपोसक्शन तकनीक का इस्तेमाल कर सर्जरी की। करीब 2 घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद नितिन की लिंग लंबाई 6 इंच तक हो गई।

“हमारे लिए सबसे अहम उसका आत्मविश्वास लौटाना था। माइक्रोपेनिस वाले कई लोग चुपचाप पीड़ा झेलते हैं और रिश्तों से कतराते हैं। समाज में इस समस्या को लेकर जागरूकता बहुत कम है,” डॉ. श्रींगारपुरे ने कहा।

डॉ. आशिष संगविकर ने बताया, “अगर इस समस्या का इलाज बचपन में शुरू कर दिया जाए तो हार्मोनल थेरेपी से भी सुधार संभव है। लेकिन बड़े होने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय रह जाता है।”

मरीज को चार दिन में मिली छुट्टी
सर्जरी के चार दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ऑपरेशन के बाद उसने कहा, “मुझे लगा था कि मेरी जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी। लेकिन डॉक्टरों ने जो किया, उसने मुझे नया जीवन दिया। अब मुझे अपने भविष्य को लेकर उम्मीद है।”

मेडिकवर हॉस्पिटल के रीजनल डायरेक्टर नीरज लाल ने कहा, “हमारी टीम हर चुनौतीपूर्ण केस को अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह की सर्जरी से कई लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सकता है।”

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