जो इंडिया / नवी मुंबई: (Rabale MIDC pharmaceutical company fire)
रबाले MIDC क्षेत्र में शुक्रवार सुबह तड़के एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में भीषण आग लग गई। यह घटना रबाले के औद्योगिक क्षेत्र स्थित ज्हेल (Jhel) फार्मास्यूटिकल कंपनी में हुई। जानकारी के अनुसार, आग सुबह करीब 2:15 बजे के आसपास लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि आसपास के इलाके में घना धुआं फैल गया और दूर-दूर तक लपटें दिखाई देने लगीं।
फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) के अग्निशमन विभाग को तुरंत अलर्ट किया गया। मौके पर छह फायर इंजिन और दो पानी के टैंकर भेजे गए। रबाले, कोपरखैरणे और वाशी फायर स्टेशन की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद सुबह करीब 10 बजे तक आग पर काबू पाया गया। आग बुझाने के दौरान अग्निशमन कर्मियों को लगातार विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई दीं, क्योंकि कंपनी के भीतर रासायनिक पदार्थ और ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी।
कंपनी को हुआ भारी नुकसान
इस आग में ज्हेल फार्मास्यूटिकल कंपनी का अधिकांश स्टॉक, मशीनें और दवाओं का कच्चा माल जलकर राख हो गया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह रही कि आग के समय कंपनी में मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली।
आग लगने का कारण अब तक अज्ञात
अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के वास्तविक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। शुरुआती आशंका है कि घटना शॉर्ट सर्किट या रासायनिक रिएक्शन के कारण हुई होगी। फिलहाल फायर ब्रिगेड और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और कंपनी प्रबंधन से पूछताछ जारी है।
स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल
आग इतनी भयानक थी कि आसपास के औद्योगिक यूनिट्स और रिहायशी इलाकों के लोग घरों से बाहर निकल आए। आग से उठता धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगते ही कई बार धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दीं, जिससे इलाके में डर का माहौल बन गया।
भविष्य के लिए बड़ी सीख
रबाले MIDC क्षेत्र में रासायनिक और औद्योगिक इकाइयों की अधिकता के कारण इस तरह की घटनाएँ अक्सर होती रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए, तो इस तरह की दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। नियमित निरीक्षण, फायर अलार्म सिस्टम और आपातकालीन मार्गों की व्यवस्था बेहद आवश्यक है।
