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1 जुलाई से मुंबई में ओला, उबर और स्कूल बस सेवाएं रहेंगी बंद, ‘की डाउन’ आंदोलन से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी, राज्य सरकार की अनदेखी पर निजी परिवहन संचालकों ने जताया आक्रोश

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जो इंडिया / मुंबई: मुंबई और उपनगरीय क्षेत्रों (Mumbai and suburban areas) में रोज़ाना लाखों लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन मानी जाने वाली ओला, उबर, स्कूल बसें और अन्य निजी यात्री सेवाएं (Ola, Uber, school buses and other private passenger services

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) आगामी 1 जुलाई 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाली हैं। इस बड़े आंदोलन की घोषणा मुंबई बस मालिक संघ और अन्य निजी परिवहन संगठनों ने की है। यह आंदोलन ‘की डाउन’ (‘Key Down’) के नाम से किया जाएगा, जिसमें सभी वाहन चालकों को गाड़ियों की चाबी नीचे रखकर सेवाएं ठप करने का आह्वान किया गया है।

यह हड़ताल राज्य सरकार द्वारा हाल ही में बेस्ट बस, टैक्सी और रिक्शा के किराये में वृद्धि की मंजूरी के बाद सामने आई है। निजी परिवहन सेवाओं का कहना है कि उन्हें भी बढ़ते ईंधन खर्च, बीमा दरों और वाहन रखरखाव लागत को ध्यान में रखते हुए किराया बढ़ाने की अनुमति दी जाए।

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Ola Uber Strike

क्या हैं प्रमुख मांगें?
मुंबई बस मालिक संघ के वरिष्ठ प्रतिनिधि मुराद नाईक ने बताया कि अगर सरकार ने 30 जून 2025 तक उनकी समस्याओं को सुलझाने की ठोस पहल नहीं की, तो सभी निजी बसें, स्कूल बसें, स्टाफ ट्रांसपोर्ट, सिटीफ्लो, ओला-उबर सहित सभी एग्रीगेटर सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

ई-चालान की अनियंत्रित और जबरन वसूली जैसी प्रणाली का विरोध

किराया निर्धारण में पारदर्शिता

स्कूल बसों के लिए पार्किंग और ड्राइवरों की सुरक्षा व्यवस्था

ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अधिकारियों द्वारा लगातार की जा रही कथित बदसलूकी

निजी परिवहन व्यवसाय के लिए अलग से स्थायी नीति

स्कूल और दफ्तर जाने वालों पर पड़ेगा गहरा असर
यह आंदोलन अगर लागू होता है तो इसका सीधा असर स्कूल जाने वाले बच्चों, ऑफिस कर्मचारियों, और दैनिक यात्रियों पर पड़ेगा। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर असर पड़ सकता है और अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था की चिंता सताने लगी है।

व्यापक समर्थन और असर
मुंबई ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, डोंबिवली, पनवेल सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में भी इस हड़ताल को निजी बस मालिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है। महाराष्ट्र के भीतर चलने वाली लंबी दूरी की बस सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह इस संकट को टालने के लिए 30 जून से पहले क्या कदम उठाती है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जुलाई से मुंबई की सड़कों पर हजारों वाहन बंद हो सकते हैं, जिससे एक बार फिर आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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