जो इंडिया / मुंबई: महाराष्ट्र की ‘लाल परी’ यानी एसटी महामंडल (Maharashtra’s ‘Red Fairy’ i.e. ST Mahamandal
विधान परिषद में एसटी की दयनीय स्थिति पर कल विशेष चर्चा हुई, जहां शिवसेना विधायक एड. अनिल परब ने जोरदार ढंग से सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसटी आम जनता की जीवनरेखा है, लेकिन अधिकारियों का भ्रष्टाचार इसे खत्म करने पर तुला है। मुख्यमंत्री ने भले ही 2,000 करोड़ की बस खरीद रद्द की हो, लेकिन इस घोटाले के सूत्रधार अधिकारियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
ई-बस घोटाले पर परतें खुलीं
परब ने कहा कि ई-बस खरीद में भी बड़ा खेल हुआ है। एसटी ने 5,050 ई-बसों की खरीद का निर्णय लिया, लेकिन शर्तों में बदलाव कर ओलेट्रा कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कंपनी चीन से बसें मंगाकर अपने स्टिकर लगाकर बेच रही है। अगर बसें सीधे निर्माता से खरीदी जातीं तो करोड़ों रुपए की बचत होती।
कर्मचारियों के साथ छलावा
उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों को सरकारी सेवा में समाहित करने का झूठा लालच देकर आंदोलन करवाया गया। आंदोलन के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और आज वही नेता कर्मचारी हितों की बात करने से बचते नजर आ रहे हैं।
‘कार्टेल’ पर कड़ी कार्रवाई की मांग
परब ने सदन में मांग की कि भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार परिवहन विभाग के अधिकारियों — उपाध्यक्ष और एमडी डॉ. माधव कोसेकर, वित्तीय सलाहकार गिरीश देशमुख, प्रभारी महाव्यवस्थापक नितीन मैन और नंदकुमार कोलारकर — पर तुरंत जांच बैठाकर कार्रवाई की जाए।
मंत्री का आश्वासन
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस पर जवाब देते हुए भरोसा दिलाया कि एसटी के कायाकल्प के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है और सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सदन में चर्चा के दौरान शशिकांत शिंदे, सदाभाऊ खोत, प्रवीण दरेकर और अन्य सदस्यों ने भी एसटी की बदहाली पर चिंता जताई और सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की।



