जो इंडिया / मुंबई: (Gas crisis)
देश और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अब आम आदमी की रसोई पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत सहित महाराष्ट्र में एलपीजी (रसोई गैस) की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल के एक बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले तीन महीनों में रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने की नौबत आ सकती है।
इस बयान के सामने आते ही आम जनता में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। पहले से ही कई शहरों और कस्बों में लोग एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं अब भविष्य को लेकर चिंता और गहराती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। खाड़ी देशों से आने वाली गैस आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने के कारण भारत में एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में इसका असर ज्यादा गंभीर रूप से महसूस किया जा रहा है।
दिल्ली बैठक में उठा मुद्दा
गैस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी, जिसमें केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरदीप सिंह पुरी और प्रहलाद जोशी सहित सभी राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस बैठक में घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति की समीक्षा की गई।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए छगन भुजबल ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से भी इस संभावित संकट के संकेत दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि वैकल्पिक उपायों पर तेजी से काम नहीं किया गया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर
भुजबल ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का विस्तार ही सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह किसी इमारत को पानी और बिजली के बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं मिलता, उसी तरह अब पीएनजी कनेक्शन को भी अनिवार्य किया जाना चाहिए।
सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठाने की योजना बना रही है। पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी सभी विभागीय अनुमतियों को अब 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है, ताकि परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकें।
केरोसीन फिर बना विकल्प
गैस संकट के बीच राज्य सरकार ने एक बार फिर केरोसीन को विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले हाईकोर्ट के आदेश के चलते इसका वितरण सीमित था, लेकिन अब सरकार ने अदालत को स्थिति से अवगत करा दिया है।
राज्य में फिलहाल लगभग साढ़े तीन हजार किलोलीटर केरोसीन उपलब्ध है। जिन क्षेत्रों में एलपीजी और पीएनजी की कमी है, वहां इसके उपयोग की अनुमति दी जा रही है। साथ ही पुराने केरोसीन डीलरों को फिर से सक्रिय करने और पेट्रोल पंपों पर टैंकर के माध्यम से वितरण की योजना बनाई जा रही है।
सरकार की तैयारी पर उठे सवाल
एक तरफ सरकार वैकल्पिक उपायों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी आशंका जताने वाले बयान ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और आम जनता दोनों ही यह पूछ रहे हैं कि यदि हालात इतने गंभीर हैं, तो पहले से ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।
आम आदमी पर बढ़ता दबाव
महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा की जरूरतों से जूझ रहे आम नागरिकों के लिए यह नई चिंता किसी बड़े झटके से कम नहीं है। रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत पर संकट की आशंका ने लोगों को असहाय बना दिया है।



