जो इंडिया / मुंबई: महाराष्ट्र में चिकित्सा क्षेत्र (Medical sector in Maharashtra
यह फैसला आते ही MBBS, MD, MS करने वाले डॉक्टरों के संगठनों में उबाल आ गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), MARD, MAGMO और AMC जैसे बड़े संगठनों ने एकजुट होकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों ने एलोपैथी की कठिन पढ़ाई करके लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए, सालों की मेहनत के बाद MBBS और MD जैसी डिग्रियां लीं, उनके भविष्य और पेशे के साथ यह अन्याय है।
डॉक्टरों के अनुसार, होम्योपैथी की पढ़ाई करने वालों को केवल एक साल के कोर्स के बाद एलोपैथी में घुसने देना न केवल गलत है, बल्कि इससे मरीजों की जान से भी खिलवाड़ होगा।
📌 डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी
IMA और अन्य संगठनों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अल्टीमेटम दिया है कि यदि यह फैसला तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों के एलोपैथिक डॉक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।
📌 15 जुलाई से लागू होगा नियम
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 जुलाई से होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे डॉक्टर एक साल का कोर्स करके रजिस्ट्रेशन कराने के पात्र होंगे।
📌 डॉक्टरों ने उठाए सवाल
एलोपैथिक डॉक्टरों का कहना है कि सरकार इस फैसले के जरिए सस्ते में डॉक्टर तैयार करके चिकित्सा क्षेत्र में मनमानी कर रही है। मरीजों को भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
📌 IMA का बयान
IMA ने अपने बयान में कहा-
> “हमने अपना खून-पसीना और सालों का समय खर्च करके एलोपैथी सीखी है। यह फैसला हमारे पेशे का अपमान है और हम इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।”



