नगरपालिका और नगरपरिषद चुनावों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मतदाता प्रक्रिया में भारी अव्यवस्था, बार-बार तारीखों में बदलाव और पारदर्शिता की कमी के चलते ये चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रहे। सत्ताधारी दलों ने चुनाव में साम, दाम, दंड और भेद की नीति का खुलेआम इस्तेमाल किया। बोगस मतदान, दबाव, सत्ता का दुरुपयोग और पैसों के बेतहाशा इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। सत्ताधारी दलों की जीत में चुनाव आयोग (Election Commission)
सत्ताधाऱ्यांच्या अनुषंगाने केलेल्या मदतीबद्दल निवडणूक आयोगाचे हार्दिक अभिनंदन. या संपूर्ण प्रक्रियेत सत्ताधाऱ्यांना सर्वात मोठे श्रेय देण्याचे काम निवडणूक आयोगानेच केले आहे. pic.twitter.com/B06OwuaeW8
— Harshwardhan Sapkal (@INCHarshsapkal) December 21, 2025
चुनाव नतीजों पर मीडिया से बातचीत करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार (BJP-led Mahayuti government) के कामकाज से जनता बेहद नाराज़ है। प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है, आम जनता के काम नहीं हो रहे हैं। ऐसे हालात में आए चुनाव परिणामों को जनमत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र और संविधान की खुलेआम अवहेलना करते हुए मतदाताओं पर दबाव डाला गया।
सपकाल ने कहा कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दलों के हाथ की कठपुतली बन चुका है। चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी, सत्ताधारी दलों द्वारा पैसे के खुले प्रदर्शन और सत्ता के दुरुपयोग का तमाशा पूरे चुनाव के दौरान देखने को मिला। इसी वजह से कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही कांग्रेस को इस चुनाव में मनचाही सफलता न मिली हो, लेकिन पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। “यह हमारी वैचारिक लड़ाई है और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं,” सपकाल ने कहा।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि नगरपालिका चुनावों में भाजपा को मिली सफलता, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगी दलों को कमजोर कर भविष्य में उन्हें किनारे लगा सकती है।
