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BJP leader conversion statement: भाजपा विधायक ने धर्मांतरण कराने वाले की हत्या पर 11 लाख के इनाम की घोषणा की, राजनीति गरमाई

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जो इंडिया / मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति (Politics of Maharashtra

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) एक बार फिर सांप्रदायिक बयानबाज़ी के कारण गरमा गई है। भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर (BJP MLA Gopichand Padalkar) ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में तूफान ला दिया है। सांगली जिले में एक युवती द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने कहा कि “जो कोई भी धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति की हत्या करेगा, उसे मैं व्यक्तिगत रूप से 11 लाख रुपये का इनाम दूंगा।”

यह बयान देते हुए पडलकर ने सीधे हिंसा को प्रोत्साहित करने की भाषा का प्रयोग किया, जिसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक आलोचना की बाढ़ आ गई है।

आत्महत्या की घटना और धार्मिक दबाव

दरअसल, यह बयान उस वक्त आया जब सांगली जिले में 28 वर्षीय महिला ऋतुजा राजगे द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि ससुराल वाले उसे ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहे थे। वह चर्च में प्रार्थना करने और बाइबल पढ़ने से इनकार करती थी, जिससे उसे मारपीट का सामना करना पड़ता था। इसी मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

पडलकर का भड़काऊ बयान

भाजपा विधायक पडलकर ने इस दुखद घटना का हवाला देते हुए कहा,

> “जो भी व्यक्ति धर्मांतरण कराता है और यदि हमारे लोग उसकी हत्या कर दें, तो मैं उस हत्यारे को 11 लाख रुपये दूंगा। यह इनाम मैं अपनी जेब से दूंगा।”

 

पडलकर ने अपने बयान में मराठी फिल्म ‘सैराट’ का भी उल्लेख किया और कहा कि यह फिल्म दिखाती है कि कैसे प्रेम और जाति के नाम पर अन्याय होता है, और अब वही स्थिति धर्मांतरण के नाम पर पैदा हो रही है।

राजनीतिक और कानूनी भूचाल

इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर हमला बोलते हुए इसे घृणा फैलाने और कानून को हाथ में लेने की खुली धमकी बताया है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने इस बयान पर भाजपा नेतृत्व की चुप्पी को भी सवालों के घेरे में रखा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यह बयान भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 505, 107 और 302 जैसी धाराओं के तहत भड़काऊ और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

भाजपा का रुख

हालांकि, अब तक भाजपा की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस प्रकार की सांप्रदायिक बयानबाज़ी का उद्देश्य वोट बैंक को साधना है।

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