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Mumbai bomb blast:1993 बम ब्लास्ट , अभी भी पकड़ से दूर है मुंबई का गुनहगार , सीना तान पाकिस्तान में घूम रहा है आजाद

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मुंबई । 1993 बम ब्लास्ट का गुनहगार 30 साल बाद भी पकड़ से दूर है। 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए एक दर्जन से अधिक बम धमाकों अंडरवर्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Underworld don dawood ibrahim) और उसके गुर्गों ने अंजाम दिया था। जिसमे में 257 लोग मारे गए थे जब कि 1400 अधिक लोग घायल हुए थे। इस हमले का मास्टरमाइंड अभी भी पकड़ से दूर है । इतना ही नही सीना तान कर पाकिस्तान में आजाद घूम रहा है । धमाकों की चार्जशीट में पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (Spy agency Inter-Services Intelligence) (आईएसआई) का नाम लिखा है। फिर भी केंद्र सरकार ने न तो हमलों में आईएसआई के क्रिटिकल फॉल्ट( ISI critical fault) की जांच की और न ही इसके अधिकारियों पर कार्रवाई की।

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रॉ ( Raw) के पूर्व चीफ विक्रम सूद बताते हैं कि मुम्बई सीरियल बम ब्लास्ट विनाशकारी आतंकवाद का पहला अनुभव था। इस इसे नाटकीय बनाया गया था।इसका मक़सद कुछ साबित करना था।ये साफ था कि इन हमलों में पाकिस्तान का हाथ था। लेकिन ये भी सच है कि इन हमलों की किसी को भी भनक तक नहीं थी और इन धमाकों ने सभी को चौंका दिया था। भारत के ख़िलाफ ये षड़यंत्र सीमा के उस पार बैठे आईएसआई के मास्टरमाइंड ने रचा और अपने इस षड़यंत्र को अंज़ाम तक पहुंचाने के लिए दाऊद और उसके गुर्गों का इस्तेमाल किया। कोवर्ट एक्शन एंड इंटरनल ऑपरेशंस’ में लिखा है कि मुंबई सीरियल धमाकों में उस वक्त के आईएसआई प्रमुख जावेद नासिर की छाप थी।उसमे लिखा इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि 1993 के मुम्बई बम धामाकों का आदेश दाऊद इब्राहिम गैंग को लेफिटिनेंट जनरल जावेद नासिर ने दिया था। लगता है कि इस ऑपरेशन की जानकारी उस वक्त प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को भी थी, क्योंकि जवेद नासिर को आईएसआई के डायरेक्टर जनरल की कुर्सी पर बिठाने वाले नवाज़ शरीफ ही थे। किसी अविश्वसनीय व्यक्ति के साथ मिल कर ऐसा कर पाना मुश्किल होता।

पाकिस्तान में मिला था ट्रेनिग

पूर्व मुम्बई पुलिस कमिश्नर एमएन सिंह ने बताया कि 1993 के बम धमाकों में पाकिस्तान का हाथ होना ज़ाहिर है। उन्होंने कहा जिन लोगों को हमने गिरफ्तार किया, उनसे हमें पता चला कि उन्हें पाकिस्तान में ट्रेन किया गया था। वो लोग पहले मुम्बई से दुबई औऱ फिर वहां से पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्ज़ के ज़रिए इस्लामाबाद ले जाए गए थे।उन्हें पाकिस्तान आर्मी ने ट्रेनिंग दी और हथियार भी दिए इन्हें शरण दी। पाकिस्तान में लैंड होने पर इन में से किसी की भी चेकिंग नहीं हुई। इमिग्रोशन और सिक्योरिटी में भी उन्हें रोका नहीं गया और जब आईएसआई साथ हो तो पासपोर्ट की ज़रुरत नहीं होती।

30 साल बाद भी पकड़ से बाहर है नासिर

जनरल नासिर के बर्ताव से हताश अमेरिका की दक्षिणी एशिया की असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टीना बी. रोक्का ने 1992 में पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संदेहास्पद देशों की कंट्रोल लिस्ट में डाले जाने की बात कही। जनरल नासिर को हालांकि 1993 में निकाल दिया गया लेकिन आज मुम्बई सीरियल ब्लास्ट के 30 साल बाद वो अब भी पकड़ से बाहर है। यूएन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद 90 के दशक में उसने बोसनियां के मुसलमानों को असॉल्ट राइफल और एंटि टैंक हथियार सप्लाई किए।2011 में पाकिस्तान सरकार ने जनरल नासिर के प्रत्यर्पित के हेग इंटरनेशनल ट्रायब्यूनल के आदेश के उलंघन किया। अब 87 साल का जनरल नासिर तबलीगी जमात का मौलवी है और जमात से 1986 से जुड़ा है।

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