मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पुणे रिवरफ्रंट डेवलपमेंट (RFD) परियोजना चर्चा का विषय बन गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और पूर्व मंत्री Aaditya Thackeray ने दावा किया है कि उनके लगातार प्रयासों और राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) को लिखे गए पत्र का असर दिखाई दिया है। राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग ने अब इस पूरे मामले की जांच कराने के आदेश दे दिए हैं।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए इसे “इम्पैक्ट” बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से वे पुणे रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना को लेकर चिंता जता रहे थे। उनका आरोप है कि इस परियोजना के दौरान पर्यावरणीय मंजूरी की कई शर्तों का उल्लंघन किया गया है। साथ ही नदी के प्राकृतिक स्वरूप और उसके प्रवाह क्षेत्र में बदलाव किए जाने की आशंका भी लगातार जताई जा रही है।
IMPACT
पुणे रिव्हरफ्रंट डेव्हलपमेंट प्रकल्पातील पर्यावरणीय मंजुरीच्या अटींचे उल्लंघन, नदीपात्राची कमी करण्यात येणारी रुंदी आणि त्यामुळे पुणेकरांवर भविष्यात निर्माण होणाऱ्या पूरधोक्याबाबत मी राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणाला पत्र लिहून तसेच पर्यावरणवादी सारंग यादवाडकर… pic.twitter.com/3C4bOTPFDQ
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) June 15, 2026
ठाकरे के अनुसार, उन्होंने SEIAA को लिखे अपने पत्र में यह मुद्दा उठाया था कि परियोजना के कारण नदी के बहाव की चौड़ाई कम हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो भविष्य में पुणे शहर को गंभीर बाढ़ के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर यदि नदी के प्राकृतिक मार्ग के साथ छेड़छाड़ की गई तो इसका खामियाजा लाखों पुणेकरों को भुगतना पड़ सकता है।
इस मामले में पर्यावरण कार्यकर्ता Sarang Yadwadkar ने भी आवाज उठाई थी और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। आदित्य ठाकरे का कहना है कि लगातार उठाई गई इन चिंताओं को आखिरकार पर्यावरण विभाग ने गंभीरता से लिया और अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच का फैसला किया गया है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि पर्यावरण और आम नागरिकों की सुरक्षा का मामला है। उनके मुताबिक, पिछले चार वर्षों से वे और उनकी पार्टी इस परियोजना के खिलाफ लगातार सवाल उठाते रहे हैं। कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए गए और सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई।
🚨 Impact Alert 🚨
For the past 4 years, we have constantly raised and protested against the planned environmental vandalism in Pune by the regime.
My letter to the State’s environment body, the SEIAA has now yielded in the SEIAA ordering an investigation on the issues raised… pic.twitter.com/WcfmvFNJ4n
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) June 15, 2026
आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों ने बार-बार विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की चेतावनियों को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में पुणे को भारी बारिश के दौरान गंभीर जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। ठाकरे ने कहा कि यह पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुणे के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। जब तक इस परियोजना से जुड़े सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
अब इस जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन, नदी क्षेत्र में बदलाव या बाढ़ के खतरे से जुड़े आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राज्य सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि जांच में सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पाई जाती हैं, तो सरकार को भी अपना पक्ष मजबूत करने का मौका मिलेगा।
फिलहाल इतना तय है कि पुणे रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना अब केवल एक विकास परियोजना नहीं रह गई है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, शहरी विकास और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी बहस का विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट क्या खुलासे करती है, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर बनी रहेगी।



