जो इंडिया / नई दिल्ली : (Nitin Gadkari)
केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री Nitin Gadkari
गडकरी ने अपने संबोधन में कहा कि राजीव गांधी उन नेताओं में थे जिन्होंने समय से पहले भविष्य की जरूरतों को पहचाना। उस दौर में जब देश में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक को लेकर शंका का वातावरण था, तब राजीव गांधी ने सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि आज भारत जिस डिजिटल क्रांति का हिस्सा है, उसके पीछे उस समय लिए गए दूरदर्शी फैसलों का बड़ा योगदान है।
उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में राजीव गांधी सरकार द्वारा लागू की गई National Policy on Education 1986 का उल्लेख किया। गडकरी ने कहा कि इस नीति ने देश में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। ग्रामीण और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए Jawahar Navodaya Vidyalaya जैसी संस्थाओं की स्थापना ने लाखों विद्यार्थियों को बेहतर अवसर दिए। साथ ही Indira Gandhi National Open University जैसे संस्थानों के माध्यम से उच्च शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
गडकरी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का कार्य किसी एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं होता। जो भी सरकार देशहित में अच्छा काम करती है, उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि पिछली सरकारों ने कोई मजबूत नींव रखी है तो उसे स्वीकार करना राजनीतिक कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परिपक्वता की निशानी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गडकरी का यह बयान भारतीय राजनीति में सकारात्मक संवाद का संकेत है। ऐसे समय में जब राजनीतिक दल एक-दूसरे के कार्यों को स्वीकार करने से बचते हैं, गडकरी ने यह संदेश दिया है कि विकास, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
उनकी यह टिप्पणी न केवल उनकी व्यक्तिगत सोच को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि लोकतंत्र में अच्छे कार्यों की सराहना करना स्वस्थ परंपरा है। गडकरी के बयान ने यह साबित किया कि देशहित में किए गए कार्यों का सम्मान समय और दलगत सीमाओं से परे होता है।



