मुंबई। (High Court takes tough line on live-in relationship)
मुंबई उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार Rajesh Khanna से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि हर लिव-इन रिलेशनशिप को ‘विवाह’ का कानूनी दर्जा नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर अभिनेत्री Anita Advani
न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकलपीठ ने निचली अदालत के 2017 के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि Dimple Kapadia ही राजेश खन्ना की वैध पत्नी थीं और दोनों के बीच कभी तलाक नहीं हुआ। ऐसे में किसी अन्य महिला के साथ संबंध को ‘विवाह जैसे संबंध’ का दर्जा देना कानूनन संभव नहीं है।
कोर्ट ने क्यों ठुकराया दावा?
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी लिव-इन रिलेशनशिप को ‘शादी जैसा’ मानने के लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी है—जैसे लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह सार्वजनिक रूप से साथ रहना, सामाजिक मान्यता और साझा घरेलू जीवन।
कोर्ट ने पाया कि Anita Advani इन मानकों को साबित करने में असफल रहीं। साथ ही, यह भी सामने आया कि वे कभी राजेश खन्ना के वैध परिवार के साथ एक ही घर में स्थायी रूप से नहीं रहीं, जिससे उनका घरेलू हिंसा कानून के तहत दावा भी कमजोर पड़ गया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद साल 2012 में शुरू हुआ, जब Rajesh Khanna के निधन के बाद Anita Advani ने दावा किया कि वे उनके साथ ‘पत्नी’ की तरह रह रही थीं और उन्हें ‘आशीर्वाद’ बंगले से बाहर निकाल दिया गया।
उन्होंने Dimple Kapadia, Twinkle Khanna और Akshay Kumar के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था।
हालांकि, 2015 में ही हाईकोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही को रद्द कर दिया था। अब ताजा फैसले में भी अदालत ने उसी रुख को दोहराते हुए सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
परिवार को मिली राहत
इस फैसले के बाद Dimple Kapadia, Twinkle Khanna और Akshay Kumar को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि संपत्ति, भरण-पोषण या वैवाहिक अधिकार केवल वैध विवाह के आधार पर ही मिल सकते हैं।
कानूनी तौर पर क्या संदेश?
यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक स्पष्ट कानूनी संदेश देता है—
*केवल साथ रहना ‘शादी’ नहीं माना जाएगा
*वैवाहिक अधिकार पाने के लिए कानूनी प्रमाण और शर्तें जरूरी हैं
*घरेलू हिंसा कानून का लाभ तभी मिलेगा जब संबंध ‘घरेलू संबंध’ की श्रेणी में साबित हो।



