जो इंडिया / मुंबई: (Palang Tod Mithai)
भारत अपनी अनोखी और पारंपरिक मिठाइयों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है “पलंगतोड़” मिठाई, जिसका नाम सुनते ही लोग चौंक जाते हैं, लेकिन एक बार स्वाद चखने के बाद इसे भूलना मुश्किल हो जाता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण यह मिठाई फिर से चर्चा में है और दूर-दराज से लोग इसे खरीदने के लिए खास तौर पर पहुंच रहे हैं।
उत्तर भारत की खास पहचान
“पलंगतोड़” मिठाई मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी और राजस्थान के भरतपुर में प्रसिद्ध है। वाराणसी की पुरानी गलियों में स्थित कुछ पारंपरिक मिठाई दुकानों पर यह खास तौर पर सर्दियों में बनाई जाती है। भरतपुर में भी यह शादी-विवाह और विशेष अवसरों की लोकप्रिय मिठाई मानी जाती है। इसकी सीमित उपलब्धता ही इसे और खास बनाती है।
दूध और मेवे से बनती है ताकतवर मिठाई
यह मिठाई पूरी तरह दूध और मेवों पर आधारित होती है। शुद्ध दूध या मलाई को कई घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, फिर उसमें चीनी, केसर, घी और बादाम-पिस्ता जैसे मेवे मिलाए जाते हैं। कुछ जगहों पर इसे परतदार बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बनावट दोनों बेहद समृद्ध हो जाते हैं। इसे तैयार करने में 8 से 12 घंटे तक लग सकते हैं, इसलिए यह सामान्य मिठाइयों से काफी अलग और मेहनत वाली होती है।
नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी
“पलंगतोड़” नाम के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यह मिठाई इतनी पौष्टिक और भारी होती है कि इसे खाने के बाद व्यक्ति को आराम करने का मन करता है, इसलिए इसका नाम “पलंगतोड़” पड़ गया। एक मान्यता यह भी है कि पुराने समय में नवविवाहित जोड़े इसे ताकत बढ़ाने वाली मिठाई के रूप में खाते थे। वहीं कुछ लोग इसकी बिस्तर जैसी लंबी बनावट को भी नाम से जोड़ते हैं।
सर्दियों में ही क्यों बनती है?
यह मिठाई शरीर को गर्म रखने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे मुख्य रूप से सर्दियों में बनाया और खाया जाता है। ठंड के मौसम में दूध और मेवों से भरपूर यह मिठाई न सिर्फ स्वाद देती है, बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करती है। इसी कारण गर्मियों में इसका उत्पादन लगभग बंद रहता है।
सोशल मीडिया से मिली नई पहचान
हाल के वर्षों में यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद यह मिठाई फिर से सुर्खियों में आ गई है। अजीब नाम और पारंपरिक तरीके से बनने के कारण लोग जिज्ञासा में इसे चखना चाहते हैं। पर्यटक अब वाराणसी या भरतपुर जाते समय इसे खरीदना नहीं भूलते।
कीमत और मांग
इस मिठाई की कीमत सामान्य मिठाइयों से ज्यादा होती है, क्योंकि इसे बनाने में समय, मेहनत और महंगे मेवे लगते हैं। बाजार में इसकी कीमत लगभग ₹800 से ₹1500 प्रति किलो या उससे अधिक भी हो सकती है। सीमित उत्पादन के कारण कई बार पहले से ऑर्डर देना पड़ता है।
परंपरा और स्वाद का अनोखा संगम
“पलंगतोड़” मिठाई सिर्फ एक डेज़र्ट नहीं, बल्कि उत्तर भारत की परंपरा, स्वाद और लोककथाओं का हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह मिठाई आज भी अपने अनोखे नाम और लाजवाब स्वाद के कारण लोगों को आकर्षित कर रही है।
