जो इंडिया /ठाणे। (Thane Trimandir Pran Pratishtha)
धर्म, संस्कृति और इंसानियत की साझा भावना को साकार करते हुए ठाणे में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब ठाणे महावीर जैन ट्रस्ट द्वारा निर्मित भव्य त्रिमंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने त्रिमंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्व शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक एकता का जीवंत प्रतीक बताया।
धार्मिक एकता का संदेश देता त्रिमंदिर
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि अलग-अलग धर्म और पंथ भले ही अपने-अपने मार्ग पर चलते हों, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य इंसानियत, शांति और आत्मिक कल्याण ही है। त्रिमंदिर इसी भावना को मूर्त रूप देता है, जहाँ किसी एक धर्म का वर्चस्व नहीं, बल्कि सभी विचारधाराओं का सम्मान है।
भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम
1 फरवरी को आयोजित यह प्राण-प्रतिष्ठा समारोह मंत्रोच्चार, विधिवत पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं, जैन समाज के प्रमुख लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की बड़ी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।
एक ही छत के नीचे तीन महान विचारधाराएँ
त्रिमंदिर की विशेषता बताते हुए शिंदे ने कहा कि यह मंदिर एक ही छत के नीचे सीमंधर स्वामी, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना के माध्यम से तीन प्रमुख आध्यात्मिक धाराओं को एक सूत्र में पिरोता है। यही कारण है कि यहाँ आने वाला हर भक्त यह महसूस करता है कि “यह मेरा ही मंदिर है।”
ठाणे की पहचान को मिली नई आध्यात्मिक ऊँचाई
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि त्रिमंदिर के निर्माण से ठाणे की पहचान अब केवल औद्योगिक और सांस्कृतिक शहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह शहर अब धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा है। उन्होंने इसे ठाणे, महाराष्ट्र और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
दादा भगवान की प्रेरणा से साकार हुआ सपना
दादा भगवान की प्रेरणा और दादा भगवान फाउंडेशन के मार्गदर्शन में निर्मित इस त्रिमंदिर का उद्देश्य विज्ञान और अध्यात्म के माध्यम से शांति, एकता और स्थायी सुख का संदेश फैलाना है। शिंदे ने कहा कि आत्म-खोज के बिना जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना संभव नहीं है, और यह मंदिर इसी आत्मबोध की ओर लोगों को प्रेरित करता है।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का हुआ स्मरण
कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा—
“कोई संघर्ष नहीं, संवाद; कोई विरोध नहीं, समन्वय; कोई विनाश नहीं, सहयोग—यही शांति का मार्ग है।”
शिंदे ने कहा कि जैसे अलग-अलग नदियाँ अंततः समुद्र में मिल जाती हैं, वैसे ही विभिन्न धार्मिक मार्ग इंसान को ईश्वर तक पहुँचाते हैं।
सेवा, दान और सामाजिक कार्यों की सराहना
इस महत्त्वपूर्ण परियोजना को साकार करने के लिए दीपकभाई और उनके सहयोगियों की निरंतर मेहनत की विशेष सराहना की गई। साथ ही मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले दानदाताओं और सेवाभावी नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया गया। शिंदे ने बताया कि बोरीवली, पुणे, ठाणे और गुजरात में भी इसी तरह के आध्यात्मिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
विकास और सुविधाओं का सरकार ने दिया भरोसा
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आश्वासन दिया कि सरकार त्रिमंदिर क्षेत्र में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कैंसर अस्पताल जैसे धर्मार्थ प्रकल्पों को भी गति मिलने की जानकारी दी।
ठाणे से दुनिया को शांति का संदेश
अपने संबोधन के अंत में शिंदे ने कहा कि इंसानियत की भलाई ही सभी धर्मों का अंतिम उद्देश्य है। यदि समाज इस लक्ष्य को मिलकर अपनाए, तो स्थायी शांति और सच्चा सुख संभव है। कार्यक्रम के समापन पर त्रिमंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी सेवकों, वॉलंटियर्स और भक्तों का आभार प्रकट किया गया।
