मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC Election 2026) की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) ने फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे कठघरे में खड़ा कर दिया। आदित्य ठाकरे ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में सिविल एविएशन मिनिस्टर द्वारा हाई फ्रीक्वेंसी रडार (HFR) को दहिसर (Dahisar HFR issue) से शिफ्ट करने के ऐलान को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ, झूठा वादा और चुनावी स्टंट” करार दिया।
Just came across a video posted yesterday by someone having the civil aviation minister announcing that the High Frequency Radar has will be shifted out from Dahisar to another location.
🚨 Lies. Fake promise. Show us the Cabinet Approval Note. 🚨
Do it first, don’t fool the…
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) January 14, 2026
आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि अगर सरकार वाकई गंभीर है तो कैबिनेट अप्रूवल नोट कहां है? उन्होंने साफ कहा कि 2014 से हर चुनाव से पहले यही स्क्रिप्ट दोहराई जाती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी वही है। पिछले कई दशकों से दहिसर के लोगों को सिर्फ़ वादे, भरोसे और घोषणाएं ही मिली हैं, काम कभी नहीं हुआ।
उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि 2014 से बीजेपी केंद्र, राज्य और दहिसर—तीनों जगह सत्ता में है। जब तीनों इंजन एक ही पार्टी के हाथ में हैं, तब भी इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं हुई? आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह मामला भारत सरकार के कैबिनेट अप्रूवल से जुड़ा है, लेकिन पिछले 10 सालों में ऐसा कोई अप्रूवल सामने नहीं आया।
आदित्य ने आरोप लगाया कि दहिसर को लगातार हल्के में लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह सवाल वह विधानसभा में भी उठा चुके हैं, लेकिन तब भी सरकार की तरफ से गोलमोल जवाब ही मिला था—और आज भी वही हाल है।
उन्होंने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा- अगर यह सच में डेवलपमेंट का मुद्दा है तो हमें गवर्नमेंट रेज़ोल्यूशन, कैबिनेट नोट या कोई आधिकारिक ऑर्डर दिखाओ। नई लोकेशन कहां है, इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट कहां है? HFR शिफ्ट होने के बाद नई जगह पर क्या असर पड़ेगा, इसका पूरा डेटा कहां है?
आदित्य ठाकरे ने दो टूक कहा कि जनता को 5 और 10 साल बाद के सपने मत दिखाओ, यह बताओ कि अब तक यह काम क्यों नहीं हुआ और लोग तुम पर अब भरोसा क्यों करें।
BMC चुनाव से पहले आए इस बयान को सीधे तौर पर सरकार की नीयत और उसकी चुनावी राजनीति पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। आदित्य ठाकरे का संदेश साफ है—अब सिर्फ़ वादे नहीं, जवाब चाहिए।



