जोइंडिया टीम/ मुंबई:
अंबादास दानवे ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि छत्रपति संभाजीनगर जिले के शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के एक मंत्री पार्टी के ही अधिकृत उम्मीदवारों को फोन कर नाम वापस लेने की धमकी दे रहे हैं। दानवे का दावा है कि यह सारा खेल सत्ताधारी पार्टी के कुछ अधिकारियों के जरिए कराया जा रहा है, जिन्हें उन्होंने “गुलाम अधिकारी” करार दिया।
दानवे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में तीखे शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि
“याद रखना, हमारा भी हिसाब-किताब है। हर चीज का हिसाब रखा जाएगा और समय आने पर ब्याज सहित चुकाना ही पड़ेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग अपनी जिम्मेदारी, काम और नैतिकता भूलकर सत्ता के इशारे पर काम कर रहे हैं, उनका राजनीतिक बाजार उखड़ जाएगा। दानवे ने साफ शब्दों में दो टूक कहा—
“झुकेगा नहीं साला!”
छत्रपती संभाजीनगर जिल्ह्यातील मंत्री शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) पक्षाच्या उमेदवारांना माघारीसाठी धमकावत आहेत. यामध्ये काही अधिकारी उर्फ सत्ताधारी पक्षाचे गुलाम फोनाफानी करत सुटले आहेत.
लक्षात ठेवा, आमच्याकडेही खातेपुस्तक आहे. हिशेब ठेवला जाईल.. वेळ आल्यावर व्याजसकट परतफेड…— Ambadas Danve (@iambadasdanve) January 1, 2026
इस बयान के बाद उद्धव ठाकरे गुट में हलचल तेज हो गई है। नॉमिनेशन विवाद अब सिर्फ दो नेताओं की आपसी खींचतान नहीं रह गया, बल्कि पार्टी के भीतर सत्ता, दबाव और नैतिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इस विवाद को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो इसका सीधा असर पार्टी की चुनावी रणनीति और छवि पर पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें उद्धव ठाकरे पर टिकी हैं कि वे इस अंदरूनी संकट पर क्या रुख अपनाते हैं और किन नेताओं पर भरोसा जताते हैं।
