जो इंडिया / नवी मुंबई। (Kharghar Shiv Mahapuran Katha)
Advertisement
नवी मुंबई के खारघर स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड (Corporate Park Ground, Kharghar) में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा के षष्ठम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने शिव भक्ति के माध्यम से धर्म, धार्मिक आचरण, श्रेष्ठ संस्कार, उत्तम स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए हजारों श्रद्धालुओं को प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भाव-विभोर होकर शिव महापुराण कथा का श्रवण किया।
पूज्य श्री ठाकुर जी महाराज ने कहा कि शिव महापुराण कथा का श्रवण सौभाग्य से प्राप्त होता है। यह अवसर हर किसी को सहज रूप से नहीं मिलता, बल्कि वही व्यक्ति इसका लाभ ले पाता है, जिसके पूर्व जन्मों के कर्म पुण्यशाली होते हैं। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव के स्वरूप, उनकी करुणा, लीलाओं और कल्याणकारी शक्ति का जीवंत दर्शन कराता है। इसके नियमित श्रवण से आत्मा में व्याप्त अज्ञान, अहंकार और विकारों का नाश होता है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
कथा के दौरान महाराज ने मास की दोनों एकादशी के व्रत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे स्वयं के साथ-साथ अपने बच्चों को भी एकादशी व्रत का महत्व समझाएं और इसका पालन कराएं। एकादशी व्रत से बच्चों में संयम, अनुशासन, धैर्य और इंद्रिय-निग्रह जैसे सद्गुण विकसित होते हैं, जो उनके चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं और जीवन में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देते हैं।
उन्होंने कहा कि धर्म ही अंतिम समय का सच्चा सहारा है। मनुष्य को जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि अंतिम समय में धन, वैभव, पद, प्रतिष्ठा और सांसारिक सुख साथ नहीं जाते, बल्कि केवल धर्म से अर्जित पुण्य ही आत्मा का संबल बनता है। धर्ममय जीवन ही मनुष्य को वास्तविक शांति और संतोष प्रदान करता है।
शिव भक्ति की विधि बताते हुए पूज्य श्री ठाकुर जी महाराज ने कहा कि शिवलिंग पर जल अर्पण सदैव अपने घर के लोटे से करना चाहिए। घर का लोटा व्यक्ति की ऊर्जा, भावनाओं और संस्कारों से जुड़ा होता है, जिससे अर्पित जल के माध्यम से श्रद्धा और भक्ति सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है।
जीवन के सुख-दुख के चक्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा होता है। सुख के समय भी जो व्यक्ति धर्म का पालन करता है, वही सच्चा बुद्धिमान होता है, क्योंकि सुख में किया गया धर्म ही दुख के समय उसकी रक्षा करता है और उसे मानसिक व आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए महाराज ने कहा कि आज परिवारों के टूटने का मुख्य कारण धर्म और संस्कारों का अभाव है। जब घरों में प्रार्थना, सत्संग, व्रत-त्योहार और संस्कारों की परंपरा जीवित रहती है, तो परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपसी संबंध मजबूत होते हैं।
शिव महापुराण कथा के माध्यम से पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने भक्तों को धर्ममय जीवन जीने, श्रेष्ठ संस्कार अपनाने और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने का सारगर्भित और प्रेरणादायी संदेश दिया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प भी लिया।
