नगरपालिका चुनावों (municipal elections) के बाद अब महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों की सियासी जंग ने जोर पकड़ लिया है। एक तरफ शिवसेना और मनसे के गठबंधन ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में भी बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पुणे समेत राज्य की कई महानगरपालिकाओं में शरद पवार (Sharad Pawar) और अजित पवार (Ajit Pawar) एक साथ चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस संभावित गठजोड़ को लेकर 26 तारीख को औपचारिक घोषणा की जा सकती है। यदि यह गठबंधन होता है, तो इसका सीधा असर न सिर्फ पुणे बल्कि पूरे महाराष्ट्र की महानगरपालिका राजनीति पर पड़ेगा।
पुणे बना सियासी केंद्र
पुणे में शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के एक मंच पर आने की चर्चा ने एनसीपी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। लंबे समय से दो धड़ों में बंटी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को अब नेतृत्व के एकजुट होने की उम्मीद नजर आ रही है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि दोनों नेताओं की ताकत अगर एक साथ आती है, तो पुणे में एनसीपी फिर से मजबूत स्थिति में लौट सकती है।
कहना है कि पुणे में यह एकजुटता भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। मौजूदा हालात में भाजपा ने अजित पवार को कमजोर करने के लिए नई सियासी रणनीति तैयार की है, जिसमें शिवसेना (शिंदे गुट) को सक्रिय भूमिका देने की चर्चा है।
महाविकास आघाड़ी की शर्त
इस पूरे घटनाक्रम पर महाविकास आघाड़ी के नेताओं की भी नजर है। आघाड़ी से जुड़े नेताओं का साफ कहना है कि यदि शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी एक साथ आती है, तो अजित पवार को महायुति से अलग होना होगा। उनका तर्क है कि वैचारिक और राजनीतिक रूप से दोनों गठबंधनों में एक साथ रहना संभव नहीं है।
बदलता राजनीतिक समीकरण
पुणे की राजनीति धीरे-धीरे नया रूप ले रही है। जो शरद पवार और अजित पवार कभी एक-दूसरे के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे, आज उनके बीच संवाद और समन्वय के संकेत दिखने लगे हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महानगरपालिका चुनावों को देखते हुए दोनों पक्षों ने टकराव के बजाय तालमेल की राह चुनने का मन बना लिया है।
बताया जा रहा है कि भाजपा द्वारा बनाई जा रही रणनीति से बचने के लिए अजित पवार को शरद पवार का राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन बेहद जरूरी लग रहा है। वहीं शरद पवार भी मानते हैं कि अगर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है, तो संगठन को एकजुट करना वक्त की मांग है।
26 तारीख पर सबकी नजर
अब राजनीतिक गलियारों की नजरें 26 तारीख पर टिकी हैं। यदि उस दिन शरद पवार और अजित पवार की साझा रणनीति का ऐलान होता है, तो यह महाराष्ट्र की महानगरपालिका राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह गठजोड़ न सिर्फ एनसीपी के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि भाजपा, महायुति और महाविकास आघाड़ी—तीनों के चुनावी गणित को नए सिरे से परिभाषित कर देगा।



