जो इंडिया / मुंबई – (Sunburn Festival Protest)
सदैव विवादों में रहा तथा गोवा और पुणे से निष्कासित किए जाने के बाद इस वर्ष 19 से 21 दिसंबर के दौरान शिवड़ी, मुंबई में आयोजित किया जाने वाला ‘सनबर्न फेस्टिवल’ नशीले पदार्थों के अत्यधिक सेवन, युवाओं की मृत्यु, अश्लीलता तथा शासन के कर की चोरी के लिए कुख्यात रहा है। ऐसे ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर 18 दिसंबर को शिवड़ी में ‘नशा-विरोधी संघर्ष अभियान’ के तत्वावधान में जन आंदोलन किया गया। इस आंदोलन में युवा वर्ग, राष्ट्रप्रेमी नागरिक तथा विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में सहभागी हुए।
दादर, वाशी, नेरुल, वसई और विरार में पिछले एक सप्ताह से ‘नशा-विरोधी संघर्ष अभियान’ की ओर से ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के विरोध में आंदोलन किए जा रहे हैं। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर जिलों सहित महाराष्ट्र के अनेक स्थानों से इस कार्यक्रम का तीव्र विरोध हो रहा है। युवाओं को नशीले पदार्थों की दलदल में धकेलने वाला ऐसा कार्यक्रम महाराष्ट्र की पवित्र भूमि पर कभी भी आयोजित नहीं होना चाहिए—यह मांग सर्वत्र की जा रही है।
नशीले पदार्थों के वितरण के लिए बदनाम, बच्चों की मृत्यु के लिए उत्तरदायी, शासन के कर की चोरी करने वाला तथा युवा पीढ़ी को नशे के लिए उकसाने वाला ‘सनबर्न फेस्टिवल’ प्रशासन द्वारा अनुमति क्यों प्राप्त करता है—यह प्रश्न इस आंदोलन के माध्यम से उपस्थित किया गया। साथ ही, ‘नशा-विरोधी संघर्ष अभियान’ ने यह भी मांग की है कि ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को छत्रपति शिवाजी महाराज की महाराष्ट्र भूमि से ही नहीं, बल्कि पूरे देश से स्थायी रूप से निष्कासित किया जाए।
इस अवसर पर
‘शिवड़ीवासियों एक बनो | सनबर्न का धिक्कार करो’,
‘सनबर्न तेरी क्या पहचान | नशापान और नशापान’,
‘सनबर्न तूने क्या किया | देश का पैसा लूट लिया’,
‘युवाओं को जगाना है | सनबर्न को भगाना है’,
‘सनबर्न हटाओ | मुंबई बचाओ’,
‘सनबर्न हटाओ – देश बचाओ’,
‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’
जैसे नारे लगाए गए। साथ ही आंदोलनकारियों ने ‘सनबर्न’ के विरोध में हस्त फलक हाथों में धारण कीये थे।
