वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने रविवार को X (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़े बयान के जरिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने RSS की हिंदुत्व आधारित राष्ट्र की परिकल्पना को “राष्ट्र-विरोधी” करार देते हुए कहा कि भारत को किसी एक धर्म की पहचान तक सीमित करना संविधान और देश की बुनियाद पर हमला है।
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता, धर्मनिरपेक्षता और बराबरी के सिद्धांतों में है, और जो भी संगठन देश को “हिंदू राष्ट्र” बनाने की कोशिश करता है, वह बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के मूल विचारों के विपरीत खड़ा होता है।
“RSS की विचारधारा राष्ट्र-विरोधी” — आंबेडकर
आंबेडकर ने X पर लिखा- “RSS की हिंदुत्व विचारधारा और यह दावा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होना चाहिए। राष्ट्र के साथ विश्वासघात है। जिस क्षण कोई संगठन देश की पहचान एक धर्म से तय करने की कोशिश करता है, वह बाबा साहेब के भारत और संविधान पर आक्रमण करता है।”
उन्होंने कहा कि भारत का निर्माण किसी एक धर्म, संस्कृति या परंपरा पर आधारित नहीं है, बल्कि इसे जानबूझकर बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक और समान अधिकारों वाले राष्ट्र के रूप में गढ़ा गया है।
“भारत किसी एक धार्मिक पहचान में सीमित नहीं किया जा सकता”
आंबेडकर ने आगे कहा- भारत की आत्मा उसकी बहुलता में बसती है। संविधान ने हर नागरिक को धर्म, संस्कृति और जीवन शैली की स्वतंत्रता दी है।
किसी एक धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय पहचान बनाना देश की जड़ों को कमजोर करना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी एक विचारधारा को “राष्ट्र की अंतिम परिभाषा” बनाने दिया गया, तो इससे भारत की एकता और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर असर पड़ेगा।
सियासत में गर्माहट बढ़ी
RSS पर इस तरह का सीधा हमला आने वाले चुनावी माहौल में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक राष्ट्रवाद बनाम संवैधानिक राष्ट्रवाद की बहस अब और तेज हो सकती है।



