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Saint George Hospital Mumbai: मुंबई के सेंट जॉर्ज अस्पताल का आईसीयू बना ‘मौत का अड्डा’ : 3 साल में 520 मरीजों की जान गई, आरटीआई में खुला लापरवाही का राज

Deepak dubey
Last updated: October 30, 2025 3:27 am
Deepak dubey
Published: October 30, 2025
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आयुर्वेदिक-होम्योपैथिक इंटर्न्स से कराई जा रही क्रिटिकल केयर ड्यूटी, बायोमैट्रिक सिस्टम जानबूझकर ठप

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जो इंडिया / मुंबई: (Saint George Hospital Mumbai)

मुंबई का सरकारी सेंट जॉर्ज अस्पताल इन दिनों अपनी खतरनाक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। आरटीआई से उजागर हुई जानकारी ने इस प्रतिष्ठित अस्पताल के आईसीयू को ‘डेथ वार्ड’ करार देने पर मजबूर कर दिया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में 1276 मरीजों में से 520 की मौत हो चुकी है — यानी हर पांच में से दो मरीज की जिंदगी अस्पताल की दहलीज पर ही खत्म हो गई।

सिर्फ इतना ही नहीं, 13 फीसदी मरीजों ने इलाज अधूरा छोड़ दिया, जो इस बात का संकेत है कि अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर मरीजों का भरोसा पूरी तरह डगमगा चुका है। यह स्थिति तब है जब अस्पताल में क्रिटिकल केयर की ड्यूटी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इंटर्न्स से कराई जा रही है — जो आईसीयू में काम करने के लिए योग्य नहीं माने जाते।

तीन वर्षों में भयावह आंकड़े

आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार मई 2022 से जुलाई 2025 के बीच सेंट जॉर्ज अस्पताल के आईसीयू में कुल 1276 मरीज भर्ती किए गए। इनमें से 520 मरीजों की मौत हुई, जबकि 169 मरीजों ने बीच में इलाज छोड़ दिया।
वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं –

वर्ष भर्ती मरीज मौतें मृत्यु दर इलाज अधूरा छोड़ने वाले मरीज प्रतिशत

2022 201 80 40% 24 12%
2023 357 136 38% 54 15%
2024 476 186 39% 55 12%
2025 (जुलाई तक) 242 118 48.76% 36 15%

साल 2025 में अब तक की मृत्यु दर 48.76% पहुंच गई है, जो किसी भी सरकारी अस्पताल के लिए चेतावनी की घंटी है।

आरटीआई में बड़ा खुलासा

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि जेजे अस्पताल के एमडी और रेजिडेंट डॉक्टर सेंट जॉर्ज आईसीयू की ड्यूटी से बचते हैं, क्योंकि यहां उन्हें अतिरिक्त ‘ऑन कॉल’ ड्यूटी करनी पड़ती है। वहीं, सेंट जॉर्ज में नियुक्त डॉक्टरों पर आरोप है कि कई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आते, फिर भी तनख्वाह उठाते हैं। कुछ डॉक्टर दो अलग-अलग अस्पतालों में एक साथ काम कर रहे हैं और दो-दो वेतन ले रहे हैं।

बायोमैट्रिक सिस्टम ठप, जवाबदेही गायब

अस्पताल में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के आदेश होने के बावजूद उसे जानबूझकर ठप रखा गया है ताकि ड्यूटी शेड्यूल और हाजिरी की जांच न की जा सके। आरटीआई एक्टिविस्ट एड. तुषार भोसले ने बताया कि अस्पताल ने भर्ती और मौत के आंकड़े तो दिए, लेकिन डॉक्टरों के नाम और ड्यूटी टाइमिंग्स छिपा लीं, जिससे पूरा सिस्टम संदिग्ध हो गया है।

उनका कहना है कि कई गंभीर मरीजों को जेजे अस्पताल भेज दिया जाता है, फिर भी यहां मौत का आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच जाना घातक लापरवाही का सबूत है।

सरकार को सौंपी गई शिकायत

एड. भोसले ने यह मामला मेडिकल एजुकेशन एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट (DMER), आयुक्त और निदेशक को भेजा है। मामला फिलहाल सेंट जॉर्ज अस्पताल को कार्रवाई के लिए भेजा गया है, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने जवाब नहीं दिया है।

अस्पताल प्रशासन का बचाव

सेंट जॉर्ज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनायक सावर्डेकर ने इन आरोपों को आंशिक रूप से गलत बताया है। उन्होंने कहा,

> “डायरेक्ट एडमिशन के आंकड़े गलत दिए गए हैं। आईसीयू में वॉर्ड से मरीजों को एडमिट करते हैं, वहीं उनका इलाज जारी रहता है। वार्षिक मृत्यु दर 15% के करीब है, न कि 40%।”

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