जो इंडिया / मुंबई:
यह चौंकाने वाला आंकड़ा विधान परिषद में बुधवार को शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के विधायक सुनील शिंदे ने पेश किया। उन्होंने इस पर गहरी चिंता जताते हुए इन मौतों की जांच कराने की मांग की और पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठोस नीति लागू करने पर जोर दिया।
📍 जांच की जरूरत क्यों?
तारांकित प्रश्नोत्तर काल में सुनील शिंदे ने कहा कि मुंबई पुलिस बल पर मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और यह अब जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने मांग रखी कि इन मौतों की जांच वरिष्ठ अधिकारियों या मुंबई विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विशेषज्ञों से कराई जाए, ताकि सही कारणों का पता चल सके।
शिंदे ने सरकार से यह भी पूछा कि पिछले चार वर्षों में पुलिस बल में इस समस्या को हल करने के लिए आखिर कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए, ताकि मौजूदा पुलिसकर्मियों का काम का बोझ कम हो।
📍 परिजनों को मिले नौकरी, मिले घर
शिंदे ने यह भी स्पष्ट मांग की कि कर्तव्य के दौरान जिन पुलिसकर्मियों की मौत हुई या जिन्होंने आत्महत्या की, उनके परिजनों को पुलिस विभाग में बिना शर्त नौकरी दी जाए। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए रियायती दर पर आवास उपलब्ध कराने और पुनर्वास नीति लागू करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
📍 सरकार का जवाब
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि मृतक पुलिसकर्मियों के परिजनों ने किसी भी प्रकार की शिकायत या संदेह दर्ज नहीं कराया है, इसलिए सरकार ने इन मौतों में किसी अलग जांच की जरूरत नहीं समझी।
वहीं, मंत्री योगेश कदम ने बताया कि मृतक पुलिसकर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नीति के तहत नौकरी दी जाती है।
📍 सरकार के दावे: स्वास्थ्य के लिए विशेष पहल
राज्य सरकार का दावा है कि पुलिस बल के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को सुधारने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें फ्री हेल्थ चेकअप कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टरों की काउंसलिंग, 40 तरह की बीमारियों का मुफ्त इलाज, टाटा और ए.के. मेहता अस्पतालों के साथ कैंसर कैंप और पुलिसकर्मियों के लिए जिम की सुविधाएं शामिल हैं।
✅ जनता का सवाल: आखिर कब सुधरेगी पुलिस बल की हालत?
इन दावों के बावजूद पुलिसकर्मियों की लगातार मौतों और आत्महत्याओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार के ये कदम जमीन पर असर दिखा रहे हैं या फिर पुलिसकर्मियों का दर्द केवल आंकड़ों तक सीमित रह गया है?



