जो इंडिया / नई दिल्ली :
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बुधवार को न्यायमूर्ति सूर्य कांत और एन.के. सिंह की पीठ के समक्ष यह मामला रखा। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने केवल बहुमत वाले विधायकों के आधार पर फैसला किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि असली पार्टी की पहचान बहुमत से तय नहीं की जा सकती।
सिब्बल ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को चार सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा करने को कहा है, ऐसे में यदि नाम और प्रतीक पर पहले निर्णय नहीं हुआ तो एक बड़ा संवैधानिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
न्यायालय ने फिलहाल कहा है कि अवकाशकालीन कार्यसूची में मामला महत्वपूर्ण होने पर शामिल किया जा सकता है। ठाकरे गुट का कहना है कि इस निर्णय से न केवल पार्टी की पहचान प्रभावित होती है, बल्कि मतदाताओं में भ्रम की स्थिति भी बनती है।
