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लोगो की हड्डियां टूटने तक मारे !, ये पुलिस उसका गला पकड़, कुत्ते जैसे मार उसे, गौतमी पाटिल की लावणी में अब्दुल सत्तार की एक्टिंग, खुद दिए लाठीचार्ज का आदेश

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सिल्लोड – लावणी डांसर गौतमी पाटिल(Lavani Dancer Gautami Patil)के शो में फैंस के हंगामे की खबर नई नहीं है। लेकिन बुधवार को गौतमी पाटिल की लावणी में, सिल्लोड के बेताज बादशाह, मिंधे गुट के संस्कारी मंत्री अब्दुल सत्तार के दिखावे में दर्शकों को पुलिस की लाठियां खानी पड़ी। कार्यक्रम में हंगामा होते देख सत्तार तिलमिला गए और उन्होंने सीधे पुलिस को आदेश दिया कि ‘लोगों को तब तक पीटा जाए जब तक उनकी हड्डियां न टूट जाएं।’ हे पुलिस वाले, इसे कुत्ते की तरह मारो, इसकी कमर तोड़ दो… अगर ये न मानें तो जेल में डाल दो, केस कर दो… क्या हजारों पुलिस वाले हजारों लोगों पर लाठियां नहीं चला सकते, मारो, मारो … ऐसा आदेश सत्तार ने दिया।

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मिंधे गुट के मंत्री अब्दुल सत्तार ने अपने जन्मदिन पर दस दिवसीय सिल्लोड उत्सव का आयोजन किया है। इस महोत्सव में बुधवार को गौतमी पाटिल का कार्यक्रम हुआ। गौतमी पाटिल और दर्शकों का हंगामा तय है।भीड़ उमड़ेगी इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस ने भराड़ी रोड पर इस आयोजन के लिए कड़ी सुरक्षा रखी थी। जैसे ही गौतमी पाटिल मंच पर आईं, युवा दर्शकों ने सिल्लोड को अपने सिर पर ले लिया। पुलिस ने दर्शकों को संभालने की कोशिश की, लेकिन इसकी वजह से अफरा तफरी मच गई। यह देख अब्दुल सत्तार खुद मंच पर आ गये।

छड़ी मारो, ठोको…

अब्दुल सत्तार ने माइक संभाला और दर्शकों को डांटना शुरू कर दिए। फिर भी दर्शकों को न सुनता देख सत्तार का पारा फिसल गया वह खुद ही पुलिस को आदेश देने लगेm वे पुलिस को लाठी मारो, कुत्तों की तरह मारो, ठोको, कमर तोड़ दो जैसी भड़काऊ भाषा में आदेश देने लगे। जैसे ही मंत्री ने खुद आदेश जारी किया, पुलिस ने कार्यक्रम का आनंद लेने आये दर्शकों की भी पिटाई कर दी। सत्तार ने भड़काऊ भाषा का भी इस्तेमाल किया कि हजार पुलिसवाले हैं, क्या पचास हजार लोगों को नहीं मार सकते?

लाठीचार्ज का आदेश देने का अधिकार किसे ?

कानून में लाठीचार्ज किस परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है कि लाठीचार्ज का आदेश देने का अधिकार किसे है। कार्यक्रम स्थल पर सिल्लोड पुलिस अधिकारी मौजूद थे। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। मंच से हिंसक भाषा का इस्तेमाल करते हुए पुलिस को भड़काऊ आदेश जारी करने के लिए अब्दुल सत्तार पर आपराधिक संहिता के तहत मामला दर्ज करने की मांग की जाने लगी हैं।

अब्दुल सत्तार को गुस्सा क्यों आता है

अब्दुल सत्तार का जन्मदिन सिल्लोडकरों के लिए भोजन, पेय और मनोरंजन का एक बड़ा उत्सव है, सिल्टोडकर हर साल 1 जनवरी से 10 जनवरी तक इसका आनंद लेते हैं, जन्मदिन के दिन असर की शुभकामना देने के लिए लोग दो-दो घंटे तक कतार में खड़े रहते हैं।लेकिन इस साल सिल्लोडकर लाइन में खड़े नहीं हुए। यहां तक कि सत्तार की कार के सामने खड़े होकर सलामी देने वाले अधिकारी भी पीछे नहीं हटे।मराठा आरक्षण आंदोलन का असर सत्तार के जन्मदिन पर भी पड़ा। तो सत्तार का पारा पहले ही उतर चुका था। दर्शकों ने हंगामा कर इसे और बढ़ा दिया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा, कोई लाठीचार्ज नहीं हुआ

जब ग्रामीण पुलिस अधीक्षक मनीष कलवानिया से पूछा गया कि क्या वे अब्दुल सत्तार द्वारा इस्तेमाल की गई भड़काऊ भाषा के लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज करेंगे तो वे मामले से इंकार कर दिया। कलवानिया ने सत्तार की बात की पुष्टि की, लेकिन यह भी दावा किया कि पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान लाठीचार्ज नहीं किया, जो कि सरासर झूठ है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्तार ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया उस पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता

अब्दुल सत्तार के संस्कारी भाषा वाले वीडियो रातों-रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। नेटिज़न्स ने सत्तार की खरी खोटी सुनाई । इसके बाद सत्तार को होश आया और उन्होंने हमेशा की तरह न्यूज चैनलों के सामने माफी मांगी।

बिल्कुल सत्तार की कहानी की तरह…

हे पुलिसवालों, पीछे से उन पर डंडे बरसाओ, इतना मारो कि उनकी हड्डियाँ टूट जाएँ। इस सामने देखो… हाना… हाना… अरे पुलिस वाले वापस आ जाओ… हाना उन्हें… उन्हें एक तोला दे दो… अरे बैठ जाओ… क्या तुम्हारे पिता ने कभी शो देखा था… आदमी का औलाद है… प्रोग्राम को आदमी की तरह ले लो… कुछ लोग दिखावा कर रहे हैं… मैं देख रहा हूं.. किसी ने भेजा है.. मुझे पता है… नौटंकी हैं, सिखाए हुए तोते हैं… मेरे लोग टूटे बिना नहीं रहेंगे उनकी पीठ…उन्हें कुत्ते की तरह मारो…उन्हें वापस लॉकअप में ले जाओ…

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