जोइंडिया, बिजनेस डेस्क: (Gold prices fall)
हाल के दिनों में यह खबर चर्चा में है कि रूस बड़ी मात्रा में सोना बेच रहा है। करीब 14 टन की बिक्री और आगे 25 टन बेचने की तैयारी। पहली नजर में यह आंकड़ा बड़ा लगता है और लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या इससे सोने की कीमतें गिर जाएंगी? भारत जैसे देश, जहां सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा का हिस्सा है, वहां इसका असर सबसे अधिक हो सकता है। आर्थिक तंगी के चलते रूस द्वारा 14–25 टन सोना बेचना एक महत्वपूर्ण खबर जरूर है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित है। वैश्विक बाजार के विशाल आकार को देखते हुए यह मात्रा बहुत छोटी है। इसलिए कीमतों में हल्की और अस्थायी गिरावट संभव है।
सोने की कीमतों पर संभावित असर
इसपर दो तरह से प्रभाव पदतक़ है। अल्पकालिक (Short-Term) प्रभाव मतलब, जब बाजार में अचानक अतिरिक्त सोना आता है, तो कीमतों पर हल्का दबाव बन सकता है। ट्रेडर्स इसे नकारात्मक संकेत मानते हैं, जिससे कुछ समय के लिए कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि यह गिरावट आमतौर पर सीमित और अस्थायी होती है। जबकि दीर्घकालिक (Long-Term) प्रभाव मतलब, लंबे समय में सोने की कीमतें केवल आपूर्ति से तय नहीं होतीं। इसके पीछे कई बड़े कारक काम करते हैं। जैसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई, ब्याज दरें और केंद्रीय बैंकों की खरीद। अगर ये कारक मजबूत हैं, तो छोटी-मोटी बिक्री से कीमतों पर खास फर्क नहीं पड़ता।
सोना निवेश के लिए सुरक्षित
जानकारों की माने तो रूस की यह बिक्री तब महत्वपूर्ण बन सकती है जब बहुत बड़ी मात्रा (सैकड़ों टन) एक साथ बाजार में आए कई देश एक साथ सोना बेचने लगें या वैश्विक बाजार पहले से ही कमजोर स्थिति में हो, इन परिस्थितियों में कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई व्यापक संकेत नहीं है। बुलियन मार्किट के विशेषज्ञ राजकुमार बाफना के अनुसार भारत में असर बहुत कम होगा। दीर्घकाल में सोने की कीमतें अन्य बड़े आर्थिक कारकों से ही तय होंगी। सोना निवेशकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बना हुआ है।
भारत में सोने की कीमतें बढ़ने के प्रमुख कारण
भारत में सोने की कीमतें कई घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं। जैसे रुपया बनाम डॉलर की स्थिति, आयात शुल्क, और शादी-त्योहारों की मांग। इसलिए रूस की बिक्री का असर यहां सीधा नहीं दिखता। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी गिरावट आती भी है, तो भारत में उसका असर सीमित होता है और कुछ दिनों में संतुलन बन जाता है।
सोने का वैश्विक बाजार में आकार
सोने का अंतरराष्ट्रीय बाजार बहुत विशाल है। हर साल दुनिया में लगभग 3,000 से 3,500 टन सोना खनन के जरिए आता है। इसके अलावा पहले से मौजूद (above-ground) सोना 2 लाख टन से भी ज्यादा है। दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक जैसे और हजारों टन सोना अपने भंडार में रखते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में रूस द्वारा बेचे जा रहे 14–25 टन सोने को देखें, तो यह वैश्विक आपूर्ति का बहुत छोटा हिस्सा है। इसलिए इसका सीधा और बड़ा प्रभाव पड़ना मुश्किल है।



