जो इंडिया / मुंबई: (Language dispute over cremation receipt)
मुंबई में हाल ही में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों के बाद एक बार फिर भाषा का मुद्दा गरमा गया है। घाटकोपर स्थित हिंदू श्मशानभूमि में मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए दी जाने वाली रसीद गुजराती भाषा में छपी होने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे मुंबई महानगरपालिका के कामकाज नियमों की खुली अवहेलना बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
मिली जानकारी के अनुसार घाटकोपर पश्चिम क्षेत्र की हिंदू श्मशानभूमि में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को जो पावती दी जा रही है, वह पूरी तरह गुजराती भाषा में छपी हुई है। इस बात का खुलासा होने के बाद स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
इस मुद्दे को सबसे पहले उठाते हुए मनसे के घाटकोपर विभाग सचिव एडवोकेट अभिषेक सावंत ने मुंबई महानगरपालिका प्रशासन को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई में मनपा की अधिकृत कामकाज की भाषा मराठी है, ऐसे में किसी भी सरकारी सेवा से जुड़ी पावती या दस्तावेज मराठी अथवा अंग्रेजी में होना चाहिए। इसके बावजूद गुजराती में पावती देना नियमों के खिलाफ है।
अभिषेक सावंत ने मनपा के संबंधित सहायक आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि यह मामला सिर्फ भाषा का नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता का भी है। उन्होंने श्मशानभूमि में दी जा रही पावती की प्रतियां भी अधिकारियों को सौंपते हुए कहा कि यह पूरी तरह गुजराती में छपी है और आम नागरिकों के लिए इसे समझना भी मुश्किल हो सकता है।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर सवाल सामने आया है। जिस पावती को अंतिम संस्कार के बाद लोगों को दिया जा रहा है, उस पर मुंबई महानगरपालिका का आधिकारिक लोगो या नाम भी छपा हुआ नहीं है। ऐसे में यह संदेह पैदा हो गया है कि क्या यह पावती वास्तव में मनपा की ओर से जारी की जा रही है या फिर किसी निजी संस्था द्वारा दी जा रही है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि यह पावती मनपा की आधिकारिक नहीं है, तो श्मशानभूमि परिसर में निजी स्तर पर रसीद जारी करना गंभीर अनियमितता है और इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं यदि यह मनपा की ओर से ही दी जा रही है, तो फिर गुजराती भाषा का उपयोग करना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
दरअसल मुंबई महानगरपालिका के प्रशासनिक नियमों के अनुसार जन्म और मृत्यु से जुड़े सभी प्रमाणपत्रों तथा आधिकारिक दस्तावेजों में मराठी और अंग्रेजी भाषा का उपयोग किया जाता है। महाराष्ट्र सरकार के नियमों के मुताबिक स्थानीय प्रशासनिक कामकाज की मुख्य भाषा मराठी मानी जाती है। इसी कारण मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सामान्यतः मराठी और अंग्रेजी में ही जारी किए जाते हैं।
मनपा के आधिकारिक पोर्टल पर भी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया मराठी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है और प्रमाणपत्र भी इन्हीं भाषाओं में जारी किए जाते हैं। ऐसे में श्मशानभूमि में गुजराती भाषा में पावती दिए जाने की घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मुंबई में मराठी भाषा और स्थानीय प्रशासनिक नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि इस मामले में तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
वहीं मनपा प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों की मांग है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि श्मशानभूमि में गुजराती भाषा में पावती क्यों दी जा रही है और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है।
Language dispute over cremation receipt: गुजराती में रसीद मिलने से मचा बवाल, विपक्ष ने मनपा पर साधा निशाना
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