By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Joindia.co.in: Hindi News, ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचारJoindia.co.in: Hindi News, ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचारJoindia.co.in: Hindi News, ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचार
Notification Show More
Font ResizerAa
  • सिटी
    • मुंबई
    • नवीमुंबई
    • ठाणे
    • मीरा भायंदर
    • कल्याण
    • पालघर
    • दिल्ली
    • बंगलुरू
    • कोलकत्ता
  • राजनीति
  • क्राइम
  • देश-दुनिया
  • रोचक
  • खेल
    • फिल्मी दुनिया
  • हेल्थ शिक्षा
  • वेब स्टोरी
    • काव्य-कथा
      • आध्यात्म
Reading: सांप्रदायिकता का खतरनाक ‘खेला’, राजनीतिक मजबूरी क्यों ?: विश्वनाथ सचदेव
Share
Font ResizerAa
Joindia.co.in: Hindi News, ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचारJoindia.co.in: Hindi News, ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचार
  • सिटी
  • राजनीति
  • क्राइम
  • देश-दुनिया
  • रोचक
  • खेल
  • हेल्थ शिक्षा
  • वेब स्टोरी
Search
  • सिटी
    • मुंबई
    • नवीमुंबई
    • ठाणे
    • मीरा भायंदर
    • कल्याण
    • पालघर
    • दिल्ली
    • बंगलुरू
    • कोलकत्ता
  • राजनीति
  • क्राइम
  • देश-दुनिया
  • रोचक
  • खेल
    • फिल्मी दुनिया
  • हेल्थ शिक्षा
  • वेब स्टोरी
    • काव्य-कथा
Have an existing account? Sign In
Follow US

Home » सांप्रदायिकता का खतरनाक ‘खेला’, राजनीतिक मजबूरी क्यों ?: विश्वनाथ सचदेव

कल्याणमुंबईराजनीति

सांप्रदायिकता का खतरनाक ‘खेला’, राजनीतिक मजबूरी क्यों ?: विश्वनाथ सचदेव

Deepak dubey
Last updated: October 16, 2024 7:19 am
Deepak dubey
Published: October 16, 2024
Share
Vishwanath Sachdev
SHARE

मुंबई। उत्तर प्रदेश के बहराइच(Bahraich in Uttar Pradesh)में जो कुछ हुआ और हो रहा है वह कोई नई बात नहीं लग रहा। सांप्रदायिकता(Communalism)की आग को हवा देकर मनुष्य को मनुष्य से दूर करने का ‘खेल’ हमारी राजनीति का आजमाया हुआ हथियार रहा है। आज़ादी से पहले और आज़ादी प्राप्त करने के बाद भी अक्सर हमारे यहां धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम राजनीतिक ताकतें करती रही हैं। यह खतरनाक ‘खेला’ कितना राजनीतिक लाभ देता है या दे सकता है, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। सच तो यह है कि सांप्रदायिकता और जातीयता के नाम पर वोटों की राजनीति सब कर रहे हैं। क्या यह सचाई नहीं है कि हमारे राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन का आधार “जीतने की संभावना” को बताकर जातीयता या धर्म का ही सहारा लेते हैं। कौन-सा दल ऐसा है जो अपना उम्मीदवार तय करने के लिए यह नहीं देखता कि क्षेत्र विशेष में किस जाति या धर्म के लोग अधिक प्रभावशाली हैं? यह एक पीड़ादायक सचाई है कि विविधता में अपनी ताकत देखने वाला हमारा देश धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि के आधार पर भीतर ही भीतर लगातार बंटता जा रहा है? हमारे राजनेता कुछ भी कहें, पर राजनीतिक नफे-नुकसान का गणित अक्सर इन्हीं आधारों पर तय होता है। यह एक शर्मनाक सचाई है। पर कितनों को शर्म आती है इस सचाई पर?

Advertisement

 

सच तो यह है कि हम इस सचाई से रूबरू होना ही नहीं चाहते। यदि ऐसा न होता तो कभी तो हम अपने राजनेताओं से पूछते कि उनकी कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों है? क्यों अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए वे धर्म या जाति के नाम पर बंटने के खतरों को समझना नहीं चाहते?

 

आज भाजपा वाले कांग्रेस पर यह आरोप लगाते नहीं थकते कि वह तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है, अब भी कर रही है, और दूसरी ही सांस में उनकी सरकारें एक तरफ बहुसंख्यकों को रिझाने में लगी दिखती हैं और दूसरी ओर अल्पसंख्यकों पर डोरे डालती! उत्तर प्रदेश में मदरसों की राजनीति का खेल हम अरसे से देखते चले आ रहे हैं। ‘मदरसों की राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों’ का हवाला देने से न थकने वाले जब महाराष्ट्र में चुनाव के मद्देनजर मौलवियों का वेतन बढ़ाते दिखते हैं हाँ राजनीति का दोमुंहापन छिपाये नहीं छिपता। सवाल मौलवियों को उचित वेतन मिलने का नहीं है। सबको उनका उचित देय मिलना ही चाहिए, पर जब दूसरे द्वारा किया कोई काम “रेवड़ी बांटना” लगे और स्वयं वही काम करना “न्याय देना” तो इसे एक घटिया राजनीति के अलावा और क्या कहा जाएगा?

हाल ही में एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने यह आशा व्यक्त की थी कि धर्म को राजनीति से दूर रखा जायेगा। पर देश ने यह आशा कब नहीं की थी? और कब उसकी यह आशा पूरी हुई? जब बड़े-बड़े राजनेता चुनावी सभाओं में कपड़ों के आधार पर लोगों को पहचानने की बात करते हैं, मंगलसूत्र छीनने का हवाला देते हैं, मंदिर-मस्जिद के नाम पर राजनीति करते हैं, तो सवाल तो उठाना ही चाहिए कि यह सब कहने का अधिकार और अवसर उन्हें क्यों दिया जाये? जब हमने आज़ादी पायी थी तो अपने लिए धर्मनिरपेक्षता का रास्ता चुना था। आज भी कुल मिलाकर देश की जनता सर्वधर्म समभाव के आदर्श में ही विश्वास करती है लेकिन, आज भी कुछ लोग हैं हमारे देश में जो बंटवारे के समय रह गए कथित “अधूरे काम” को अब पूरा करने की दुहाई दे रहे हैं! क्या अर्थ है इस कथित पूरे काम का? आखिर वे चाहते क्या हैं? और क्यों ऐसी बात कहने वालों को बेनकाब नहीं किया जाता? बहुसंख्यकों को एकजुट होने के समय का हवाला देने वालों को यह क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि विश्वास, भगवान और राजनीति के बीच रेखाएं क्यों मिटायी जा रही हैं? जीवन में विश्वास और धर्म का अपना स्थान है–इन्हें राजनीतिक नफे-नुकसान के तराजू पर नहीं तोला जाना चाहिए। पर दुर्भाग्य से ऐसा करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। और यह काम बिना किसी हिचकिचाहट के हो रहा है! कहीं कोई मुख्यमंत्री अपने राज्य में मंदिरों के विकास का आश्वासन दे रहा है तो कहीं चुनावी सभाओं में बड़े राजनेता धार्मिक नारे लगवाना ज़रूरी समझने लगे हैं। हद तो तब हो जाती है जब ‘ईश्वर-अल्लाह तेरा नाम’ कहना भी किसी राजनेता को खटकने लगता है! उनकी शिकायत यह है कि राष्ट्रपिता बापू के प्रिय भजन के यह शब्द तो मूल भजन में थे ही नहीं! इसे बीमार मानसिकता के अलावा और क्या संज्ञा दी जा सकती है?

 

यह देश 140 करोड़ भारतीयों का है, हम सबका है। इसकी पहचान को किसी धर्म विशेष के नाम से जोड़े जाने की कतई आवश्यकता नहीं है। हम किसी भी धर्म को मानने वाले क्यों न हों, मूलत: हम सब भारतीय हैं। हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हम सब धर्मों को आदर की दृष्टि से देखते हैं। ईश्वर एक है, धर्म उस तक पहुंचने का मार्ग हैं। मार्ग भले ही अलग-अलग हों, पर सब पहुंचाते एक ही लक्ष्य पर हैं। महात्मा गांधी जब ‘सबको सन्मति दे भगवान’ वाली बात कहते थे तो मनुष्य मात्र के कल्याण का सोच था इसके पीछे। सर्वे भवंतु सुखिनः वाले आदर्श में विश्वास करने वाली चेतना वाले देश में जब कोई राजनेता “अंजाम बुरा होगा” या “ज़बान काट ली जायेगी” जैसी बातें कहता है तो यह सवाल भी मन में उठता है कि ऐसी बातों को हम सहते क्यों हैं?

 

नहीं, हमें यह सब नहीं सहना। ऐसी बातों पर चुप्पी का मतलब एक मौन समर्थन ही हो सकता है। ग़लत बातों का ऐसा समर्थन अपराध भी है और पाप भी। धर्म के नाम पर समाज में दीवारें खड़ी करने वाले, चाहे वे किसी भी धर्म को मानते हों, उस समाज के दुश्मन हैं जो दुनिया भर को बंधुत्व का मंत्र देने वाला है। यह वह मानवीय समाज है जिसके आंगन में धर्म या जातीयता की दीवारें खड़ी करना अपने आप में एक गंभीर अपराध है। विवेकशील नागरिक का कर्तव्य है कि वह ऐसे अपराध करने वालों को सही रहा पर चलने की प्रेरणा दे। ‘बटेंगे तो कटेंगे’ जैसी बात का सिर्फ एक ही अर्थ हो सकता है– हम सब मनुष्य बने रहें। इसका और कोई भी अर्थ मनुष्यता को कलंकित करने वाला है। अपने भीतर के मनुष्य को जागृत रखना ही हमारे अस्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। उत्तर प्रदेश के बहराइच में भी यह जागृति ज़रूरी थी और बिहार के सीतामढ़ी में भी। ध्यान रहे, कोई ‘बहराइच’ या ‘सीतामढ़ी’ हमारे भीतर मनुष्यता की पराजय का ही प्रतीक है। यह पराजय किसी भी शर्त पर स्वीकार्य नहीं हो सकती।

हमने भगवान का दर्शन किया उसपर टिका करना बचपना है- आदित्य ठाकरे
NAVI MUMBAI: पीड़ित की शिकायत दर्ज करने के बजाय थाने में मारपीट , पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज
वसई–विरार में जीत का चेहरा बने कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर, हितेंद्र ठाकुर ब्रांड की वापसी के बने अहम स्तंभ
Good news: अनियमित स्कूल बस चालक की अब नहीं है खैर, RTO करेगी कार्रवाई
रूममेट्स पर चोरी का आरोप लगाकर किया निर्वस्त्र , वीडियो बनाकर किए वसूली
TAGGED:BahraichMaharashtra newsmumbai newsUttar pradesh
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
Popular News
dr r n cooper municipal general hospital and hbt medical college vile parle west mumbai hospitals pyrdz
क्राइममुंबईसिटी

Cooper Hospital doctor attack: मुंबई के कूपर अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा – परिजन ने डॉक्टर को पीटा, वीडियो वायरल

Deepak dubey
Deepak dubey
November 9, 2025
Ola cab used in theft: Wadala में ओला कैब से हो रही थी फलों और नारियल की चोरी – RAK Marg पुलिस ने 6 घंटे में कैब जब्त की, CCTV ने खोला राज
गोखले रेलवे पुल का लांच हुआ पहला गर्डर, 1300 मीट्रिक टन है गर्डर का वजन, 15 फरवरी तक पुल खोलने का अनुमान  
रेलवे की लापरवाही से हुई शटिंगमैन की दर्दनाक मौत, दिल्ली से दिए गए जांच के आदेश,रेलवे यूनियनों और परिजनों में आक्रोश
Maharashtra gets new Governor: आचार्य देवव्रत ने 22वें राज्यपाल के रूप में संभाला पदभार
- Advertisement -
Ad imageAd image
Global Coronavirus Cases

Confirmed

0

Death

0

More Information:Covid-19 Statistics

Categories

  • सिटी
  • राजनीति
  • क्राइम
  • देश-दुनिया
  • फिल्मी दुनिया
  • खेल
  • वेब स्टोरी

ब्रेकिंग न्यूज़, हिंदी समाचार - Joindia News

Joindia में आपका स्वागत है। यह आपका विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ पोर्टल है, जो देश-दुनिया की ताज़ा और सटीक ख़बरें आप तक पहुँचाता है। हम उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश समेत सभी प्रमुख राज्यों की लोकल हरकतों को खास अंदाज में कवर करते हैं। साथ ही, राशिफल, मनोरंजन और वायरल वीडियो से आपको हर पल जोड़े रखते हैं।

Subscribe US

Joindia की ताज़ा ख़बरें अब आपके मेल में भी! हमारे न्यूज़लेटर से जुड़ें और हर पल बने रहें अपडेट।

@2022-25 - joindia.co.in. All Right Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?