जो इंडिया / नई दिल्ली: (Delimitation & Women’s Bill Clash)
संसद के मानसून सत्र में निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन (परिसीमन) विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी टकराव लगातार गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्द पारित कराने की कोशिश में है, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और राम मंदिर की दानपेटी में हुई कथित चोरी के मामले पर सरकार सदन में जवाब नहीं देती, तब तक इन विधेयकों पर चर्चा आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
विपक्ष का आरोप है कि मानसून सत्र शुरू हुए लगभग दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन इन दोनों मुद्दों पर न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कोई बयान दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार पहले इन घटनाओं पर जवाबदेही तय करे और उसके बाद ही परिसीमन तथा महिला आरक्षण जैसे अहम विधेयकों पर चर्चा शुरू की जाए।
इसी मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। कई बार कार्यवाही बाधित हुई और सदन को स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
गतिरोध खत्म करने की कोशिश रही बेनतीजा
संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने के प्रयास में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की। इस बैठक में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार ने परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस का रुख जानने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि पहले छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और राम मंदिर की दानपेटी में हुई कथित चोरी के मामले पर सरकार सदन में जवाब दे। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और जवाब के बिना किसी नए विधेयक पर आगे बढ़ना उचित नहीं होगा।
विशेष सत्र की तैयारी
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक पेश करने के बजाय 16 से 18 अगस्त के बीच तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इस विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को प्राथमिकता के साथ लाया जा सकता है।
उधर, विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो विशेष सत्र में भी उसका विरोध जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।



