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AI layoffs 2026: एआई की आंधी में उड़ रहीं नौकरियां, 6 महीनों में लाखों कर्मचारियों पर संकट, अब मिडिल क्लास युवाओं की बढ़ी चिंता

Deepak dubey
Last updated: May 29, 2026 12:44 pm
Deepak dubey
Published: May 29, 2026
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जो इंडिया / नई दिल्ली: (AI layoffs 2026)

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देश-दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ रफ्तार अब युवाओं के रोजगार पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। टेक्नोलॉजी कंपनियां जहां एक तरफ एआई को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी एआई के नाम पर हजारों कर्मचारियों की छंटनी लगातार जारी है। आईटी और टेक सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के बीच नौकरी जाने का डर तेजी से बढ़ रहा है। कई कंपनियों में कर्मचारियों को अचानक ई-मेल भेजकर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 के शुरुआती 28 दिनों में ही दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों ने करीब 28 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। पिछले छह महीनों में यह आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच चुका है। अमेरिका, यूरोप और भारत समेत कई देशों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, सपोर्ट स्टाफ और प्रोजेक्ट मैनेजर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब मानव कर्मचारियों की जगह एआई टूल्स और ऑटोमेशन सिस्टम को प्राथमिकता दे रही हैं। पहले जिन कामों के लिए 50 लोगों की टीम लगती थी, अब वही काम कुछ एआई सॉफ्टवेयर और सीमित कर्मचारियों के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे कंपनियों का खर्च तो कम हो रहा है, लेकिन लाखों युवाओं के सामने बेरोजगारी का खतरा खड़ा हो गया है।
दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने हाल के महीनों में बड़े स्तर पर छंटनी की है। सोशल मीडिया दिग्गज Meta ने अपने हजारों कर्मचारियों को हटाकर एआई आधारित प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ाया है। ऑनलाइन पेमेंट कंपनी PayPal, नेटवर्किंग कंपनी Cisco, फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर कंपनी Intuit और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म LinkedIn जैसी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे अपने सिस्टम को “स्मार्ट और ऑटोमेटेड” बना रही हैं।
भारत में भी इसका असर तेजी से दिखाई देने लगा है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे आईटी हब में काम करने वाले युवा लगातार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। कई कंपनियों ने नई भर्तियां रोक दी हैं, जबकि कुछ कंपनियां कर्मचारियों को “री-स्किलिंग” के नाम पर कम वेतन वाले विभागों में भेज रही हैं। स्टार्टअप सेक्टर में भी फंडिंग संकट और एआई के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरियों में कटौती बढ़ गई है।
आईटी सेक्टर से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि सबसे ज्यादा दबाव मिडिल लेवल कर्मचारियों पर है। कंपनियां अनुभवी लेकिन अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को हटाकर कम सैलरी वाले नए कर्मचारियों या एआई सिस्टम का सहारा ले रही हैं। इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। नौकरी जाने के डर से युवाओं में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में एआई और ऑटोमेशन के कारण दुनिया भर में करोड़ों पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, एआई नए अवसर भी पैदा करेगा, लेकिन उसके लिए कर्मचारियों को नई तकनीकों में खुद को तेजी से प्रशिक्षित करना होगा। साइबर सिक्योरिटी, एआई मैनेजमेंट, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि निजी क्षेत्र में लगातार हो रही छंटनी पर निगरानी रखी जाए और युवाओं के लिए रोजगार सुरक्षा नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि केवल डिजिटल इंडिया और एआई क्रांति की बातें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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