जोइंडिया टीम/मुंबई: राज्य में आगामी नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए 1999 के बाद पहली बार नगर निगम चुनावों (Municipal Corporation elections)
कांग्रेस (Congress) इस बार महानगरों में सीमित समझौतों के बजाय अधिकतर सीटों पर सीधे मुकाबले के मूड में नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने यह फैसला कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया है।
इन प्रमुख नगर निगमों में कांग्रेस का बड़ा चुनावी दांव
नगर निगम चुनावों में कांग्रेस जिन सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनकी संख्या इस प्रकार है—
- मुंबई नगर निगम: 167 सीटें
- ठाणे नगर निगम: 101 सीटें
- पुणे नगर निगम: 100 सीटें
- पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम: 60 सीटें
- छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद): 100 सीटें
इन आंकड़ों से साफ है कि कांग्रेस ने शहरी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है।
कई नगर निगमों में कांग्रेस अपने दम पर मैदान में
खास बात यह है कि कांग्रेस कुछ अहम नगर निगमों में पूरी तरह अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। इनमें शामिल हैं—
- नागपुर
- अकोला
- अमरावती
- चंद्रपुर
इन शहरों में कांग्रेस ने किसी भी सहयोगी दल के साथ समझौता नहीं किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा जता रही है।
लातूर और नांदेड़ में आंशिक नुकसान, फिर भी मजबूत उपस्थिति
हालांकि कुछ नगर निगमों में कांग्रेस को सीटों का नुकसान भी हुआ है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी की मौजूदगी कमजोर नहीं मानी जा रही।
- लातूर नगर निगम में कांग्रेस को 5 सीटों का नुकसान हुआ है, इसके बावजूद पार्टी शेष सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
- नांदेड़ नगर निगम में कांग्रेस 20 सीटें हार चुकी है, फिर भी बाकी सभी सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि इन सीटों पर भी कांग्रेस कड़ा मुकाबला देने के लिए तैयार है।
संगठन मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस (Municipal Election Congress) का यह फैसला केवल चुनावी गणित नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति की तैयारी का हिस्सा है। शहरी क्षेत्रों में पार्टी लंबे समय से कमजोर मानी जा रही थी, ऐसे में बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए संगठन को पुनर्जीवित करने का जरिया बन सकता है।
अब देखना होगा कि नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का यह बड़ा दांव कितना असर दिखाता है और क्या पार्टी शहरी राजनीति में फिर से मजबूत वापसी कर पाती है।



