जो इंडिया / नवी मुंबई: मरीज की आंशिक नेफ्रेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक (Cancer surgery success) की गई हैं। इसमें किडनी के खराब हिस्से (ट्यूमर) को निकालकर बाकी किडनी को बचाया जाता है। और बाकी स्वास्थ्य किडनी टिश्यू को संरक्षित किया जाता हैं।
किडनी कैंसर से पिडीत ३५ वर्षी मरीज की जान बचाने में मेडिकव्हर अस्पताल के डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई हैं। मिनिमली इनवेसिव तकनीक से की गई आंशिक नेफ्रोक्टॉमी के जरिए ट्यूमर को हटाया गया और किडनी के बाकी हिस्से को सुरक्षित रखा गया, जिससे मरीज को गई जिंदगी मिली।
नवी मुंबई में रहने वाले मरीज संजय जैस्वार पेशे से ड्राइवर हैं, को कुछ दिनों से उनके पेशाब में खून आ रहा था। उन्होंने कहा,“पहले मैंने इसे नजरअंदाज किया, लगा अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन जब तीन-चार दिन तक खून आता रहा, तब डर लगने लगा। मुझे लगा पता नहीं क्या बीमारी है। मैं बहुत परेशान हो गया, काम में ध्यान नहीं दे पा रहा था और परिवार के लोग भी चिंता में थे। जब कैंसर का पता चला तो वह बहुत घबरा गए। कैंसर की खबर सुनते ही मेरी दुनिया जैसे रुक गई। वो दिन मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल थे।”
आगे के इलाज के लिए मरीज को डॉ. विकास भीसे के पास भेजा गया। जांच में उनकी बाईं किडनी में करीब २.७ सेमी का ट्यूमर निकला। डॉक्टरों ने किडनी का सिर्फ खराब हिस्सा निकालने का फैसला लिया ताकि बाकी हिस्सा काम करता रहे।
मेडिकव्हर अस्पताल के युरोलॉजिस्ट डॉ. विकास भिसे ने कहा की, “मरीज की हालत स्थिर थी, लेकिन पेशाब में खून आ रहा था। आजकल अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से जल्दी जांच हो जाती है, जिससे बीमारी का जल्दी पता चलता हैं। हमने २६ जून २०२५ को सर्जरी की। आंशिक नेफ्रेक्टॉमी से मरीज की किडनी बचाई जा सकती है, खासकर जब मरीज युवा हो। सर्जरी करीब २ घंटे चली और मरीज को दो दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अगर समय पर इलाज नहीं होता, तो कैंसर शरीर में फैल सकता था।”
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मरीज संजय जैस्वार ने कहा कि, “मैं डॉ. भीसे और उनकी टीम का दिल से आभार मानता हूं। उन्होंने मेरी किडनी ही नहीं, बल्कि मुझे नई जिंदगी दी हैं। मैं डरा हुआ था, लेकिन उनकी मदद और सहारे से मुझे हिम्मत मिली। आज मैं फिर से अपनी जिंदगी को पूरी तरह जीने के लिए तैयार हूं।”
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