जो इंडिया / मुंबई: (Nashik Conversion Case)
नासिक Nashik Conversion Case आईटी कंपनी से जुड़े कर्मचारियों के कथित धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं के बयान सरकार की मुश्किले बढ़ा रहे हैं। मंत्री शिरसाट ने कहा कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो महाराष्ट्र में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धर्मांतरण की घटनाएं किसी सुनियोजित साजिश के तहत हो रही हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है, जिसकी तुलना “कश्मीर फाइल्स” जैसी परिस्थितियों से की जा सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है।
मंत्री ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी यदि उसके समर्थक खुलकर सामने आ रहे हैं और उसे बचाने की कोशिशें हो रही हैं, तो यह प्रशासनिक विफलता का संकेत है। शिरसाट ने दावा किया कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा उसे छिपाने में मदद की गई।
उन्होंने एमआईएम के कुछ नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। शिरसाट के अनुसार, स्थानीय स्तर पर आरोपी को संरक्षण देने का प्रयास किया गया और बड़े राजनीतिक चेहरे भी उसके समर्थन में उतरते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक सुरक्षा और सांप्रदायिक संतुलन से जुड़ा गंभीर विषय है।
इस पूरे घटनाक्रम ने महायुति सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। विपक्ष का कहना है कि जब सत्ता पक्ष के मंत्री ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, तो राज्य की कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।



