जो इंडिया / मुंबई : (BMC Hawkers Issue)
महानगर में फेरीवालों के नियमन और पहचान पत्र वितरण को लेकर जारी सुस्ती पर मुंबई उच्च न्यायालय ने एक बार फिर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब प्रशासनिक ढिलाई किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। न्यायालय ने बीएमसी द्वारा मांगा गया अतिरिक्त समय खारिज करते हुए सभी पात्र फेरीवालों को पांच सप्ताह के भीतर प्लास्टिक पहचान पत्र जारी करने का आदेश दिया है।
मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति कमल खाता और न्यायमूर्ति अजय गडकरी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि इस मामले में पूर्व में कई आदेश पारित किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन अधूरा है। अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया।
कोर्ट ने कहा कि शहर में चिन्हित 99,435 पात्र फेरीवालों को तय समयसीमा के भीतर वैध पहचान पत्र देना अनिवार्य है। साथ ही, अवैध फेरीवालों पर नियंत्रण के लिए बीएमसी को एक विशेष व्हाट्सऐप शिकायत नंबर शुरू करने और उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि आम नागरिक सीधे शिकायत दर्ज करा सकें।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2014 में हुए सर्वेक्षण के तहत 29,008 फेरीवालों ने आवेदन किया था। अदालत ने पहले ही इनके सत्यापन और पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन वर्षों बाद भी मामला लंबित है। इस पर न्यायालय ने तीखी नाराजगी जताई।
बीएमसी की ओर से पेश अधिवक्ता अनिल सिंह ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन अदालत ने यह मांग सिरे से खारिज कर दी। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है और अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अदालत के इस सख्त रुख के बाद बीएमसी और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। दूसरी ओर, ‘आजाद हॉकर्स यूनियन’ समेत विभिन्न फेरीवाला संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे फेरीवालों के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
मुंबई में लंबे समय से फेरीवालों का मुद्दा विवाद और अव्यवस्था का कारण बना हुआ है। वैध और अवैध फेरीवालों के बीच अंतर स्पष्ट न होने से यातायात, अतिक्रमण और नागरिक सुविधाओं पर लगातार असर पड़ता रहा है। ऐसे में अदालत का यह आदेश प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।



