मुंबई की जल आपूर्ति को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज़ हो गई है। बुधवार को Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में प्रस्तावित Gargai Dam Project को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आरोप है कि इस परियोजना के जरिए भारी ठेकेदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि शहर के लिए पानी के वैकल्पिक और कम खर्चीले समाधान मौजूद हैं।
बैठक में Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) के सदस्यों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि मुंबई को पानी की ज़रूरत जरूर है, लेकिन इसके लिए ऐसा रास्ता चुना जाना चाहिए जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हो और कम समय में शहर की ज़रूरतों को पूरा कर सके।
इस पूरे विवाद के बीच युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर Eknath Shinde के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर सीधा हमला बोला। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि BMC स्टैंडिंग कमिटी में उनकी पार्टी के सभी सदस्यों ने गरगई डैम के नाम पर हो रही “कॉन्ट्रैक्टर पूजा” का विरोध किया है।
🚨 आज BMC स्टँडिंग कमिटीमध्ये @ShivSenaUBT_ पक्षाच्या सर्व सदस्यांनी गारगाई धरणाच्या नावाखाली होणाऱ्या कॉन्ट्रॅक्टर पूजेला विरोध केला.
⚠️ पाणी मुंबईला हवं आहेच, पण कमी खर्चात, कमी वेळात आणि पर्यावरणाचा ऱ्हास न करता आपण डिसॅलिनेशन करून अधिक पाणी प्राप्त करू शकतो.
महाविकास…
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) March 11, 2026
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई को अतिरिक्त पानी की जरूरत है, लेकिन इसके लिए डैम ही एकमात्र विकल्प नहीं है। उनका दावा है कि डीसैलिनेशन यानी समुद्री पानी को शुद्ध करने की तकनीक के जरिए कम लागत में, कम समय में और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए ज्यादा पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि Maha Vikas Aghadi सरकार के समय मनोरी में 25 एकड़ सरकारी जमीन मुफ्त देकर एक डीसैलिनेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, जिससे 2025 तक मुंबई को करीब 400 MLD पानी मिलने की योजना थी। लेकिन आदित्य ठाकरे का आरोप है कि शिंदे सरकार ने आते ही इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया।
इसके उलट सरकार अब गोराई डैम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है, जिसे लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं। आदित्य ठाकरे के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसके लिए करीब 5 लाख पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। उनका दावा है कि यह इलाका Tansa Wildlife Sanctuary के आसपास आता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी लागत और पर्यावरणीय नुकसान के बावजूद इस डैम से करीब 440 MLD पानी ही मिलेगा और वह भी पूरी तरह बारिश पर निर्भर होगा। अगर बारिश कम हुई तो पानी की उपलब्धता भी प्रभावित होगी।
आदित्य ठाकरे ने इसके मुकाबले डीसैलिनेशन प्रोजेक्ट को ज्यादा बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट करीब 600 MLD तक पानी उपलब्ध करा सकता है, सोलर एनर्जी से चल सकता है और मानसून पर निर्भर नहीं रहता।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर को कम लागत, कम समय और पर्यावरण के अनुकूल समाधान मिल सकता है तो फिर सरकार गोराई डैम पर इतना जोर क्यों दे रही है।
युवा सेना प्रमुख ने अंत में मांग की कि BMC को गोराई डैम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय मुंबई के लिए डीसैलिनेशन प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि शहर की पानी की समस्या का स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल समाधान निकल सके।
