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Sitare Zameen Par ‘सितारे जमीन पर’ के असर की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक, समय रैना को डिस्लेक्सिक व्यक्तियों को होस्ट करने का आदेश

Samay Raina

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समय रैना और चार अन्य क्रिएटर्स को निर्देश दिया है कि वे हर महीने कम से कम 2 बार अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म या पब्लिक इवेंट्स में डिस्लेक्सिक व्यक्तियों को शामिल करें। कोर्ट का यह आदेश उस विवादित वीडियो के बाद सामने आया है जिसमें कुछ कॉमेडियंस की ओर से डिस्लेक्सिक लोगों का मज़ाक उड़ाए जाने का आरोप लगा था। अदालत ने टिप्पणी की कि डिजिटल माध्यमों का प्रभाव लोगों पर काफी होता है, इसलिए इन्फ्लुएंसर्स का फर्ज बनता है कि वे सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा दें और डिस्लेक्सिक लोगों को सहायक काम करें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज लाखों लोगों तक पहुँच रखते हैं और ऐसे में जिम्मेदार कंटेंट बनाना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि डिस्लेक्सिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों को लेकर समाज में अभी भी जागरूकता की बड़ी कमी है।

अदालत ने यह भी कहा कि यह कदम सिर्फ दंडात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए उठाया गया है।

फिल्म के संदेश को अदालत ने भी माना प्रभावी

20 जून 2025 को रिलीज हुई आमिर खान प्रोडक्शंस की फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ को देशभर में काफी पंसद किया गया था. साथ ही भावनात्मक और सामाजिक मैसेज के लिए इस फिल्म की सराहना हुई थी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिल्म ने डिस्लेक्सिया पर देशव्यापी चर्चा को फिर जगा दिया है, और यही चर्चा समाज में बदलाव को आगे बढ़ा सकती है।

आर. एस. प्रसन्ना के निर्देशन में बनी फिल्म में आमिर खान और जेनेलिया देशमुख लीड रोल में हैं। फिल्म में 10 नए कलाकारों— आरूष दत्ता, गोपी कृष्ण वर्मा, समय देसाई, वेदांत शर्मा, आयुष भंसाली, आशीष पेंडसे, ऋषि शहानी, ऋषभ जैन, नमन मिश्रा और सिमरन मंगेशकर—को भी पेश किया गया है। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी शंकर–एहसान–लॉय ने संभाली है, जबकि गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य

कोर्ट के अनुसार समय रैना और अन्य क्रिएटर्स को डिस्लेक्सिक व्यक्तियों को मंच देकर उनकी कहानियाँ, संघर्ष और अनुभव साझा करने का मौका देना होगा। अदालत का मानना है कि इस पहल से न केवल डिस्लेक्सिया के प्रति समझ बढ़ेगी, बल्कि स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी जैसे दुर्लभ रोगों को लेकर भी फंड और सहायता जुटाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में एथिकल और जिम्मेदार व्यवहार की दिशा में बड़ा कदम है।

‘तारे जमीन पर’ की तरह, ‘सितारे जमीन पर’ भी समाजिक मुद्दों को मुख्यधारा में लाने में सफल रही है। अदालत का यह आदेश इस बात का प्रमाण है कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विचारों और व्यवहार में परिवर्तन का माध्यम भी बन सकता है।

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