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Marathi identity versus Hindi controversy: संदीप देशपांडे की तीखी टिप्पणी से बढ़ा राजनीतिक तापमान

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जो इंडिया / मुंबई: (Marathi identity versus Hindi controversy)

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी-हिंदी भाषा (Marathi-Hindi language)

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को लेकर एक नई टकराव की लहर उठ गई है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने हाल ही में ऐसा बयान दिया था जिसमें उन्होंने राज ठाकरे को लेकर कहा— “तुमको पटक-पटक कर मारेंगे।” यह बयान तेजी से वायरल हुआ और महाराष्ट्र में इसे मराठी स्वाभिमान पर हमला कहा जाने लगा।

संदीप देशपांडे का प्रहार

इसी विवाद के बीच MNS नेता संदीप देशपांडे (MNS leader Sandeep Deshpande) ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे एक टी-शर्ट पहने दिख रहे हैं। उस टी-शर्ट पर मराठी में लिखा था— “समुद्रात दुबे दुबे कर मारेंगे।” यह नारा राज ठाकरे की पुरानी टिप्पणी से प्रेरित बताया जा रहा है। देशपांडे ने इस प्रतीकात्मक शैली में दुबे पर सीधा तंज कसा और मराठी मानुष की भावना को सामने रखा।

MNS का रुख और देशपांडे का बयान

देशपांडे ने कहा कि महाराष्ट्र में क्या होगा, इसका फैसला सिर्फ “मराठी जनता” करेगी, न कि “दुबे, छुबे या पौबे” जैसा कोई बाहरी व्यक्ति। उनके इस बयान का मकसद यह दिखाना था कि महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा पर दूसरे राज्यों के लोगों को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया

निशिकांत दुबे ने अपने बयान का बचाव किया और कहा कि उन्होंने मराठी समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं कहा है। उन्होंने पलटवार में यह भी कहा था कि “मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी है।” इस टिप्पणी ने विवाद को और भड़का दिया। सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से समर्थन और आलोचना जैसी प्रतिक्रियाएँ जारी रहीं।

सरकार और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि भाषा पर ऐसी टिप्पणियाँ “अनुचित और भड़काऊ” हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी बातें राज्य की सामाजिक एकता को नुकसान पहुँचा सकती हैं। कई मराठी कलाकारों और नेताओं ने भी दुबे के बयान की आलोचना करते हुए मराठी अस्मिता का समर्थन किया।

विवाद का राजनीतिक असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद सिर्फ भाषा पर नहीं, बल्कि राजनीतिक जमीन पर पकड़ मजबूत करने का मौका भी बन गया है। MNS लंबे समय से मराठी अस्मिता को अपना मुख्य मुद्दा मानती रही है, और यह विवाद उनके लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद बन सकता है। वहीं, बीजेपी को इस मामले में संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है ताकि किसी समुदाय की नाराज़गी न झेलनी पड़े।

जनता की प्रतिक्रिया और आगे का माहौल

सोशल मीडिया पर मराठी युवा बड़ी संख्या में MNS के रुख का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे अनावश्यक राजनीतिक गर्मी बता रहे हैं। फिलहाल यह विवाद थमता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में यह महाराष्ट्र की राजनीति में और आग डाल सकता है।

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