जो इंडिया / मुंबई: (Cyber Fraud)
मुंबई महानगर क्षेत्र में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामले में ठाणे जिले के डोंबिवली निवासी एक 42 वर्षीय व्यक्ति को यौन उत्पीड़न के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर करीब 71.1 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर ठग अब लोगों को डराकर और मानसिक दबाव बनाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।
ऐसे शुरू हुआ ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, मार्च के पहले सप्ताह में पीड़ित को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताया। उसने पीड़ित पर आरोप लगाया कि उसके मोबाइल नंबर से महिलाओं को आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाले संदेश भेजे गए हैं, साथ ही यौन शोषण की शिकायत भी दर्ज की गई है।
ठग ने यह भी दावा किया कि पीड़ित के खिलाफ घाटकोपर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज है और मामला गंभीर होने के कारण अब जांच सीबीआई के पास चली गई है।
फर्जी CBI और ED का डर
कुछ ही देर बाद पीड़ित को दो अन्य लोगों ने संपर्क किया, जिन्होंने खुद को CBI अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं और अब इस मामले की जांच एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) समेत कई एजेंसियां करेंगी।
ठगों ने अपने झांसे को असली साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नाम पर नकली दस्तावेज भी भेजे। इन दस्तावेजों में कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया, जिससे पीड़ित पूरी तरह घबरा गया।
किस्तों में वसूले 71 लाख रुपये
आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि यदि वह “केस सेटलमेंट” के लिए पैसे दे देता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सकता है और बाद में पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजैक्शनों के जरिए कुल 71.1 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
पत्नी की सूझबूझ से खुला राज
घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने यह पूरी बात अपनी पत्नी को बताई। पत्नी ने संदिग्ध लोगों से सवाल-जवाब किए और भेजे गए दस्तावेजों की जांच की। दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर परिवार को समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस में मामला दर्ज
इसके बाद पीड़ित ने तिलक नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह के शामिल होने की संभावना रहती है।
कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से?
* किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वालों पर तुरंत भरोसा न करें
* CBI, ED, पुलिस या कोर्ट कभी फोन पर पैसे नहीं मांगते
*किसी भी प्रकार के “सेटलमेंट” या “गोपनीय जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर न करें
* संदिग्ध दस्तावेजों को हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से वेरिफाई करें
* तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत करें



