जो इंडिया / मुंबई: (School Bus Fuel Crisis)
देशभर में लगातार बढ़ती डीजल-पेट्रोल की कीमतों और ईंधन आपूर्ति संकट का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र में स्कूल बस संचालकों ने सरकार और स्कूल प्रशासन के सामने बड़ा प्रस्ताव रखते हुए मांग की है कि स्कूल सप्ताह में केवल तीन दिन ही ऑफलाइन संचालित किए जाएं, जबकि बाकी दो दिन विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाए।
स्कूल बस मालिकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने शुल्क पर बस सेवा चलाना आर्थिक रूप से पूरी तरह घाटे का सौदा बन चुका है। डीजल की बढ़ती कीमत, वाहन रखरखाव खर्च, बीमा, परमिट शुल्क और ड्राइवरों के वेतन में बढ़ोतरी ने स्कूल परिवहन क्षेत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत जून महीने से होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही स्कूल बस ऑपरेटरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो कई बस सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं। इससे लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ सकती है।
स्कूल एंड कंपनी बस ओनर्स एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान हालात में रोजाना स्कूल बसों का संचालन संभव नहीं रह गया है। संगठन ने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार 1 जून से पहले स्कूल परिवहन को लेकर स्पष्ट नीति घोषित करे और बस संचालकों के लिए विशेष सब्सिडी या अनुदान की घोषणा करे।
बस संचालकों का कहना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो विद्यार्थियों को मजबूरी में सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे लोकल ट्रेन, बस और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। साथ ही छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
अभिभावकों की बढ़ी चिंता
इस प्रस्ताव के बाद अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। कई माता-पिता का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षा पहले ही बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर डाल चुकी है। ऐसे में दोबारा हाइब्रिड मॉडल लागू होने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। वहीं कुछ अभिभावकों ने माना कि बढ़ती महंगाई के दौर में स्कूल बस किराए में अचानक बढ़ोतरी उनके बजट पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।
नागपुर में बढ़ा स्कूल बस किराया
ईंधन संकट का असर नागपुर में भी दिखाई देने लगा है। नागपुर स्कूल बस और स्कूल वैन संघटना ने सेवा शुल्क में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। इसके बाद जहां पहले अभिभावकों को 1000 रुपये मासिक किराया देना पड़ता था, वहीं अब उन्हें लगभग 1200 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। इसी तरह 2000 रुपये मासिक किराया अब बढ़कर करीब 2400 रुपये तक पहुंच सकता है।
संघटनाओं का कहना है कि यह बढ़ोतरी मजबूरी में की जा रही है, क्योंकि मौजूदा खर्चों के साथ पुराने किराए पर सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर सीधे विद्यार्थियों की शिक्षा और स्कूलों की नियमित व्यवस्था पर पड़ेगा। अब सभी की नजर महाराष्ट्र सरकार पर टिकी है कि वह स्कूल परिवहन क्षेत्र को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है।



